तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन, 14 जून 2026। मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच रविवार को एक महत्वपूर्ण शांति समझौता होने जा रहा है। ट्रम्प के अनुसार, समझौते के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट सभी देशों के जहाजों के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा।

ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि इस समझौते के बदले अमेरिका ईरान को कोई आर्थिक सहायता या नकद भुगतान नहीं देगा। उन्होंने पूर्व ओबामा प्रशासन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उस समय ईरान को अरबों डॉलर दिए गए थे, जिनमें 1.7 अरब डॉलर नकद राशि भी शामिल थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हालात सामान्य होने के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े संवेदनशील तत्वों को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया ईरान या अमेरिका में किसी भी स्थान पर पूरी की जा सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका भविष्य में ईरान और पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र के साथ स्थिर और बेहतर संबंध स्थापित करना चाहता है।
हालांकि ट्रम्प ने चेतावनी भी दी कि यदि शांति प्रक्रिया सफल नहीं होती है तो अमेरिका के पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता कूटनीतिक समाधान ही है।
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि दोनों पक्ष पहले की तुलना में समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं। हालांकि उन्होंने मीडिया से अपील की कि समझौते की शर्तों को लेकर अटकलें लगाने से बचा जाए। दूसरी ओर, तेहरान ने जिनेवा में 14 जून को समझौते पर हस्ताक्षर होने की खबरों का खंडन करते हुए कहा है कि प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
उधर, भारत ने होर्मुज क्षेत्र में भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए दूसरी बार अमेरिकी राजनयिक को तलब किया है। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि ईरान ने भारतीय नाविकों वाले जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश की थी, जबकि ईरान ने दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका पूर्ण नियंत्रण है और उसकी अनुमति के बिना कोई जहाज वहां से नहीं गुजर सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

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