नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब NEET पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष और विभिन्न छात्र संगठनों का लगातार दबाव बना हुआ था। पिछले 36 दिनों से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जंतर-मंतर पर धरना देकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही थी।

शनिवार शाम करीब 8:15 बजे राष्ट्रपति भवन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रधानमंत्री ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रह्लाद जोशी को सौंप दिया। जोशी फिलहाल खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, ऊर्जा तथा उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्री हैं और अगले आदेश तक शिक्षा मंत्रालय का कामकाज भी संभालेंगे।

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इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों ने इसे अपनी जीत बताया। CJP के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा, “सरकार कहती थी कि इस्तीफे नहीं होते, लेकिन जनता की आवाज के आगे आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा।”

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे के साथ दो पन्नों का पत्र भी जारी किया। करीब 575 शब्दों के इस पत्र में उन्होंने अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की बात कही। साथ ही उन्होंने छात्रों से निराश न होने और देश के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

12 साल में विरोध के दबाव में इस्तीफा देने वाले पहले मंत्री

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साल 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के बाद यह पहला मौका है, जब किसी केंद्रीय मंत्री ने व्यापक विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच इस्तीफा दिया है। इससे पहले 2018 में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने भी इस्तीफा दिया था, लेकिन उनका मामला ‘मी टू’ अभियान के दौरान लगे व्यक्तिगत आरोपों से जुड़ा था। वहीं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शिक्षा व्यवस्था और NEET पेपर लीक विवाद से जुड़े राजनीतिक और जनदबाव के बीच आया है।