रायपुर।

छत्तीसगढ़ में राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार और निगम, मंडल, आयोग व बोर्ड में नियुक्ति बीरबल की खिचड़ी हो गई है, जो हांडी में तो बार-बार चढ़ती है, मगर पकती ही नहीं है। दरअसल यह बातें इसलिए कहीं जा रही हैं कि क्योंकि पिछले एक साल से सत्ता में भागीदारी को लेकर दर्जनों बार चर्चाएं हुई, सवाल-जवाब हुए, संकेत दिए गए और चर्चाओं में नाम आने पर बधाइयां तक स्वीकार कर ली गई। मगर न तो मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ और ना ही निगम, मंडल में नियुक्तियों की कोई जंबो सूची जारी हुई, बस हर महीने में एक नियुक्ति का सिलसिला ही बना हुआ है। अब पिछले दो दिनों से फिर एक बार मंत्रिमंडल विस्तार और निगम, मंडल में बोर्ड को लेकर राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं।

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इन चर्चाओं से भाजपा नेताओं की धड़कनें बढ़ी हुई हैं कि नगरीय निकाय व त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आचार संहिता से पहले नियुक्तियों की कोई जंबो सूची आएगी या नहीं? यदि चुनाव आचार संहिता से लागू हो गई, तब तो इंतजार और लंबा हो जाएगा। हालांकि राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र बिन्दु में इस बार प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन हैं, जो 16 जनवरी को छत्तीसगढ़ पहुंचे थे और प्रदेशाध्यक्ष किरणदेव के निर्वाचन में शामिल हुए, किंतु इन दो दिनों में जिस तरह श्री नबीन की सक्रियता रही, उसे लेकर भाजपा नेताओं के बीच चर्चा हो रही है, क्योंकि सबको इस बात का अंदाजा है कि इसी साल बिहार में विधानसभा का चुनाव है।