बिलासपुर। प्रदेश के 343 शासकीय महाविद्यालयों में अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति में हो रही देरी से अध्ययन-अध्यापन व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अतिथि व्याख्याता नीति में कालखंड मानदेय व्यवस्था समाप्त कर संशोधित नीति लागू किए जाने के बावजूद अब तक नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।

उच्च शिक्षा विभाग के अकादमिक कैलेंडर के अनुसार एक जुलाई से नियमित कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन अधिकांश महाविद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। स्थिति यह है कि छात्र-छात्राएं रोज कॉलेज पहुंच रहे हैं, लेकिन संबंधित विषय के शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण बिना पढ़ाई किए ही वापस लौटने को मजबूर हैं।

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महाविद्यालयों के प्राचार्यों का कहना है कि अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति को लेकर विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश या आदेश जारी नहीं किए गए हैं। विभागीय अनुमति के अभाव में वे नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं कर पा रहे हैं, जिससे नियमित शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और विद्यार्थियों का शैक्षणिक नुकसान लगातार बढ़ता जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 343 शासकीय महाविद्यालयों में कई विषयों की पढ़ाई लगभग ठप है। शिक्षकों की कमी के कारण राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिक्षाविदों और विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा विभाग से मांग की है कि संशोधित नीति के अनुरूप अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए, ताकि महाविद्यालयों में नियमित पढ़ाई बहाल हो सके और विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होने से बचाया जा सके।

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