रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित DMF (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) कृषि घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के पांच दिन बीत जाने के बाद भी एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ED ने बीते मंगलवार को रायपुर, अंबिकापुर, दुर्ग और धमतरी सहित कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की थी। कार्रवाई एग्रो कारोबारियों शाश्वत लूणावत, प्रकाश सालुंगे, राकेश गुप्ता और ठेकेदार दीपेश गांधी समेत कई अन्य लोगों के ठिकानों पर की गई थी।
छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपये की बरामदगी और अहम दस्तावेज मिलने की चर्चाएं सामने आईं, लेकिन अब तक ED ने इन दावों की न तो पुष्टि की है और न ही किसी प्रकार का आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया है।
सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। हालांकि एजेंसी की ओर से चुप्पी बनाए रखने के कारण पूरे मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
गौरतलब है कि DMF कृषि घोटाला मामले की समानांतर जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) भी कर रहे हैं। छापेमारी में जिन अन्य नामों की चर्चा सामने आई है, उनमें आर.के. सिंह, संजय गुप्ता, अजय कुशवाहा, अनुग्रह कुशवाहा और सतपाल चावड़ा भी शामिल बताए जा रहे हैं।
फिलहाल ED की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आने का इंतजार किया जा रहा है। एजेंसी की चुप्पी के चलते जांच को लेकर अटकलों का दौर जारी है।