नई दिल्ली। निजी ईंधन कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की है। कंपनी ने पेट्रोल के दाम में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। नई दरें शनिवार तड़के से लागू हो गई हैं।

कंपनी के इस फैसले से नायरा के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतें सरकारी तेल कंपनियों के मुकाबले अधिक हो सकती हैं। नायरा एनर्जी के देशभर में करीब 7,108 पेट्रोल पंप हैं।

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी कीमतों का असर

ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी बाधाओं का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा है।

कंपनी ने कीमतों में ताजा बढ़ोतरी पर आधिकारिक प्रतिक्रिया के लिए भेजे गए ईमेल का तत्काल जवाब नहीं दिया।

मार्च में भी बढ़ाए थे दाम, जुलाई में मिली थी राहत

नायरा एनर्जी ने इससे पहले 26 मार्च को भी पेट्रोल में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। उस समय कंपनी के पंपों पर पेट्रोल की कीमत 100.71 रुपये और डीजल की कीमत 91.31 रुपये प्रति लीटर हो गई थी।

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इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने पर कंपनी ने 1 जुलाई को पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमश: 5 रुपये और 3 रुपये प्रति लीटर घटा दिए थे। अब कंपनी ने दोबारा कीमतें बढ़ा दी हैं।

सरकारी तेल कंपनियों ने नहीं बदले दाम

देश में पेट्रोल पंपों के नेटवर्क पर सरकारी तेल कंपनियों का बड़ा हिस्सा है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के पास देश के कुल 1,04,137 पेट्रोल पंपों में से 90 प्रतिशत से अधिक हैं।

वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज और ब्रिटेन की बीपी के संयुक्त उपक्रम जियो-बीपी के करीब 2,304 पेट्रोल पंप हैं। जियो-बीपी ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं किया है। ऐसे में अलग-अलग कंपनियों के पंपों पर ईंधन की कीमतों में अंतर बढ़ सकता है।

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बिक्री सीमित करने का मुद्दा भी उठा

एक अक्टूबर को सरकार ने निजी ईंधन विक्रेताओं से पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की बिक्री सीमित नहीं करने को कहा था। इससे पहले नायरा और जियो-बीपी ने खुदरा बिक्री में नुकसान के बीच कुछ पंपों पर ईंधन की बिक्री सीमित की थी।

अधिकारियों के मुताबिक, खुदरा और थोक डीजल की कीमतों में अंतर के कारण औद्योगिक उपभोक्ता सस्ता डीजल खरीदने के लिए खुदरा पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे थे। इससे इन पंपों पर ईंधन की मांग और आपूर्ति का दबाव बढ़ रहा था।

तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने पिछले महीने अनुमान जताया था कि सितंबर में खुदरा कीमतें स्थिर रहने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल व पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ने से तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 8 रुपये और डीजल पर करीब 9 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था।

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इक्रा के मुताबिक, पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बिक्री को मिलाकर तेल कंपनियों को प्रतिदिन करीब 530 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। एजेंसी ने कहा था कि कंपनियों के शोधन और विपणन कारोबार का संतुलन तब बनता है, जब कच्चे तेल की कीमत करीब 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहती है। इससे ऊपर कीमत बढ़ने और खुदरा दरें स्थिर रहने पर कंपनियों का नुकसान और बढ़ सकता है।