कांग्रेस ने संसद से पारित माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2026 को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि नए कानून से खनिज संपदा वाले राज्यों के खनिज अधिकारों और उनसे जुड़े कर, उपकर व लेवी लगाने की शक्तियां सीमित हो जाएंगी। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ के आर्थिक हितों और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता के खिलाफ बताया।

संसद ने यह संशोधन बिल 13 अगस्त को पारित किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा और राज्यसभा में बिल को वॉइस वोट के जरिए मंजूरी दी गई। हालांकि, विपक्ष ने इसके कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई है। केंद्र सरकार का तर्क है कि संशोधन से खनन क्षेत्र में कर और लेवी की व्यवस्था में एकरूपता आएगी और उद्योग पर अनावश्यक आर्थिक बोझ कम होगा।

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बैज बोले- राज्यों के अधिकार सीमित करने की कोशिश

दीपक बैज ने कहा कि MMDR Act, 1957 के तहत राज्यों को खनिज अधिकारों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण शक्तियां प्राप्त थीं। उनका दावा है कि संशोधन के बाद राज्य सरकारें केंद्र द्वारा निर्धारित व्यवस्था से अलग जाकर खनिज अधिकारों या खनिज वाली जमीन पर अतिरिक्त टैक्स, सेस या लेवी नहीं लगा पाएंगी।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इसे देशभर में खनन से जुड़ी कर व्यवस्था को एक समान बनाने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है, लेकिन कांग्रेस इसे राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप मानती है।

छत्तीसगढ़ के राजस्व पर पड़ सकता है असर

बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों की अर्थव्यवस्था में खनन से मिलने वाला राजस्व बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में खनिजों पर अतिरिक्त कर या लेवी लगाने की राज्य सरकारों की क्षमता सीमित होने से राजस्व संग्रह और वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।

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उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों के कारण स्थानीय स्तर पर पर्यावरण, सड़क, पानी और अन्य बुनियादी ढांचे पर दबाव पड़ता है। ऐसे प्रभावों की भरपाई के लिए राज्यों के पास पर्याप्त संसाधन जुटाने और स्थानीय जरूरतों के अनुसार निर्णय लेने की शक्ति होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का दिया हवाला

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने राज्यों के खनिज अधिकारों पर कर लगाने के अधिकार को मान्यता दी थी। बैज का आरोप है कि नया संशोधन इस फैसले से राज्यों को मिले अधिकारों के प्रभाव को सीमित करने की कोशिश है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि पहले से लगाए गए, लेकिन वसूल नहीं किए गए कुछ करों पर भी नए प्रावधानों का असर पड़ सकता है। इसे उन्होंने छत्तीसगढ़ की वित्तीय स्वायत्तता के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।

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हसदेव से बैलाडीला तक खनन का मुद्दा उठाया

दीपक बैज ने हसदेव से लेकर बैलाडीला तक छत्तीसगढ़ के खनन क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य की खनिज संपदा से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा स्थानीय विकास और प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों पर खर्च किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों के दोहन से होने वाले पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को देखते हुए राज्यों को अपने स्तर पर राजस्व जुटाने की पर्याप्त शक्तियां मिलनी चाहिए।