रायपुर। आगामी चुनावी तैयारियों से पहले छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को लेकर पार्टी के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस के अंदरखाने में चर्चा है कि अधूरी प्रदेश कार्यकारिणी, विवादित प्रभार व्यवस्था और नियमित समीक्षा के अभाव में चुनावी रणनीतियों को जमीनी स्तर तक कैसे प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाएगा।

जिला प्रभारी और विधानसभा प्रभारियों के प्रोटोकॉल को लेकर पहले से विवाद की स्थिति है। वहीं प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी भी लंबे समय से पूरी नहीं हो पाई है। इसके चलते जिला और विधानसभा स्तर पर संगठन की गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।

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प्रभारियों के दौरे नहीं, पीसीसी तक नहीं पहुंच रही जमीनी रिपोर्ट

प्रभारियों के प्रोटोकॉल को लेकर बने विवाद का असर उनके जिलों और विधानसभा क्षेत्रों के दौरों पर भी दिखाई दे रहा है। नियमित दौरे नहीं होने से स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन की स्थिति और जमीनी फीडबैक की रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी तक अपेक्षित रूप से नहीं पहुंच पा रही है। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि चुनावी रणनीति तैयार करने के लिए जमीनी फीडबैक और बूथ स्तर की नियमित रिपोर्टिंग बेहद जरूरी है। ऐसे में संगठनात्मक ढांचे की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है।

AICC की समीक्षा के बाद बनेगा चुनावी रोडमैप

छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन के कामकाज की अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) स्तर पर समीक्षा के बाद अब चुनावी तैयारियों को लेकर रोडमैप तैयार किए जाने की संभावना है। संगठन के निचले स्तर के कैडर को मजबूत करने और संगठनात्मक कमियों को दूर करने के लिए दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं। हालांकि प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक ढांचा अभी पूरी तरह व्यवस्थित नहीं हो पाया है। प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी के अधूरे होने और पदाधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

निष्क्रिय पदाधिकारियों पर कार्रवाई का इंतजार

संगठन में लंबे समय से जमे और निष्क्रिय पदाधिकारियों को लेकर भी पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा है। करीब पांच माह पहले संगठन की बैठक में प्रभारी महासचिव सचिन पायलट ने निष्क्रिय पदाधिकारियों को लेकर शिकायतों पर कार्रवाई का संकेत दिया था, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। मौजूदा स्थिति में जिला कांग्रेस संगठनों पर राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ संगठनात्मक जिम्मेदारियों का भी अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।

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मोर्चा, प्रकोष्ठ और विभागों की सक्रियता पर भी सवाल

कांग्रेस के विभिन्न मोर्चा, प्रकोष्ठ और विभागों की गतिविधियों को लेकर भी संगठन के भीतर चर्चा है। कई इकाइयों की प्रदेश स्तर पर सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है और उनके कामकाज की नियमित समीक्षा भी लंबे समय से नहीं हुई है। हालांकि कुछ विभाग और प्रकोष्ठ चुनिंदा क्षेत्रों में सक्रिय नजर आते हैं, लेकिन प्रदेशव्यापी स्तर पर उनकी प्रभावी उपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

चुनाव से पहले संगठन को दुरुस्त करना चुनौती

आगामी चुनाव को देखते हुए कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को सक्रिय, जवाबदेह और जमीनी स्तर तक प्रभावी बनाना है। जिला से लेकर विधानसभा और बूथ स्तर तक नियमित मॉनिटरिंग, प्रभारियों की सक्रियता और निष्क्रिय पदाधिकारियों पर निर्णय को चुनावी तैयारियों के लिए अहम माना जा रहा है।

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