रायपुर। नोट छापने और कारोबार में भारी मुनाफा दिलाने का झांसा देकर देशभर के कारोबारियों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का रायपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पुणे के खंडाला स्थित एक रिसोर्ट में दबिश देकर गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 4 करोड़ रुपये नकद, 17 मोबाइल फोन, काले रंग में रंगे नोट, नोट के आकार के कागज, कांच की प्लेटें, केमिकल और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

पुलिस के मुताबिक, इसी गिरोह ने नवा रायपुर में सोलर एनर्जी कंपनी संचालित करने वाले बालोद के एक युवा कारोबारी से 1.13 करोड़ रुपये की ठगी की थी। प्रारंभिक जांच में गिरोह के 2005 से सक्रिय होने और अब तक देशभर में 100 से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस को गिरोह द्वारा 200 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी किए जाने का अनुमान है।

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25 फीसदी असली नोट छापने का करते थे दावा

गिरोह के सदस्य संपन्न कारोबारियों को कारोबार में बड़ी रकम निवेश करने और बदले में मोटा मुनाफा कमाने का लालच देते थे। आरोपी दावा करते थे कि उनके पास सरकार से 25 फीसदी असली नोट छापने का एग्रीमेंट है। साथ ही वे देश-विदेश के बड़े निवेशकों से संपर्क होने की बात कहकर कारोबारियों का भरोसा जीतते थे। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, सुरक्षा स्वीकृति और नोट छापने के लिए जरूरी केमिकल मंगाने के नाम पर अलग-अलग किस्तों में रकम वसूली जाती थी। शुरुआत में कम रकम लेकर कारोबारियों को विश्वास में लिया जाता था।

केमिकल से नोट साफ करने का करते थे ‘डेमो’

पुलिस के अनुसार, गैंग के सदस्य 4-5 लाख रुपये लेकर काले रंग में रंगे असली नोटों को केमिकल की मदद से साफ करने का दिखावा करते थे। इसके बाद कारोबारी को दोगुनी रकम दिखाकर यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनके पास असली नोट तैयार करने की तकनीक और विशेष केमिकल मौजूद है। जब कारोबारी पूरी तरह उनके जाल में फंस जाता था, तब आरोपी बड़ी रकम की मांग शुरू कर देते थे। रकम देने में आनाकानी करने पर अलग-अलग तरीकों से दबाव बनाया जाता था।

डी कंपनी का खौफ दिखाकर बनाते थे दबाव

गिरोह के मुख्य आरोपी ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव और मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर खुद को ‘डी ग्रुप कंपनी’ यानी दाऊद ग्रुप से जुड़ा बताते थे। पीड़ितों पर प्रभाव जमाने के लिए वे नेताओं और अभिनेताओं के साथ अपनी तस्वीरें दिखाते थे। आरोपी निजी गनमैन रखते थे और कारोबारियों से मुलाकात के लिए फाइव स्टार होटल, रिसोर्ट तथा आलीशान मकानों का इस्तेमाल करते थे। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य अपने ही साथियों के साथ मारपीट का दिखावा कर पीड़ितों में भय पैदा करते थे, ताकि वे किसी के सामने शिकायत करने की हिम्मत न जुटा सकें।

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2005 से चल रहा था ठगी का नेटवर्क

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह वर्ष 2005 से सक्रिय है। इस दौरान इसके दो सदस्य मुंबई और वाराणसी में दो-दो बार गिरफ्तार भी हो चुके हैं, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद गिरोह ने फिर अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया। छत्तीसगढ़ के अलावा दिल्ली, नोएडा, पुणे, बड़ौदा और उदयपुर समेत कई शहरों के लोग इनके शिकार हुए हैं। ज्यादातर पीड़ितों के सामने नहीं आने के कारण गिरोह लंबे समय तक बेखौफ होकर ठगी का नेटवर्क चलाता रहा।

नागपुर से गिरफ्तार दो महिलाओं से मिला बड़ा सुराग

डीसीपी क्राइम स्मृतिक राजनाला और डीसीपी सेंट्रल तारकेश्वर पटेल के मुताबिक, मामले में गिरोह की दो महिला सदस्यों कनिज फातमा और दीपिका पालीवाल को कुछ दिन पहले नागपुर से गिरफ्तार किया गया था। इनकी गिरफ्तारी के बाद देशभर के कई पीड़ितों ने रायपुर पुलिस से संपर्क किया। पीड़ितों ने आरोपियों के फोटो, वीडियो और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य पुलिस को उपलब्ध कराए। इन्हीं जानकारियों के आधार पर पुलिस को गिरोह के खंडाला स्थित रिसोर्ट में सक्रिय होने का पता चला।

रिसोर्ट में छापा, चार करोड़ रुपये नकद बरामद

रायपुर पुलिस की टीमों ने शुक्रवार को खंडाला स्थित रिसोर्ट में दबिश दी। यहां से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान करीब 4 करोड़ रुपये नकद, 17 मोबाइल फोन, नोट के आकार के काले कागज, कांच की प्लेटें, केमिकल और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए। आरोपियों को शनिवार दोपहर बाद रायपुर लाया गया। पुलिस अब बरामद नकदी, मोबाइल और दस्तावेजों की जांच कर गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों तथा देशभर में की गई ठगी के मामलों की जानकारी जुटा रही है।

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ये सात आरोपी गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपियों में ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी (46), निवासी हरियाणा, वर्तमान पता नालासोपारा, मुंबई; प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी (52); मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर (55); विवेक सिंह (48), तीनों वाराणसी, उत्तरप्रदेश; शुभम पांडेय (37), गोरेगांव ईस्ट, मुंबई; तथा योगेन्द्र चौहान (48) और बालमुकुंद दीक्षित (40), दोनों जौनपुर, उत्तरप्रदेश शामिल हैं।