नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल आया है। क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत जिस क्रूड बास्केट से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है, उसकी कीमत हाल में 117.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। पिछले वित्त वर्ष में इसका औसत करीब 66 डॉलर प्रति बैरल रहा था। ऐसे में घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल राहत की उम्मीद कमजोर पड़ गई है।

तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव

भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें लंबे समय से स्थिर हैं। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपए और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर है। आम उपभोक्ताओं को कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी से राहत मिल रही है, लेकिन सरकारी तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—पर महंगे क्रूड का दबाव बढ़ रहा है।

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दिए गए अनुमानों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 8 रुपए और डीजल पर लगभग 9 रुपए प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इन शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम

शहर

पेट्रोल (₹/लीटर)

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डीजल (₹/लीटर)

दिल्ली

102.12

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95.20

मुंबई

111.21

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97.83

कोलकाता

113.51

99.82

चेन्नई

107.78

99.56

जयपुर

112.69

97.78

पटना

113.35

99.36

लखनऊ

101.86

95.36

अमृतसर

105.56

96.20

बेंगलुरु

110.82

98.77

छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में स्थिति

रायपुर में पेट्रोल 108.08 रुपए और डीजल 101.60 रुपए प्रति लीटर है। बिलासपुर में पेट्रोल 108.64 और डीजल 101.90 रुपए है। वहीं भोपाल में पेट्रोल 114.57 और डीजल 99.64 रुपए तथा इंदौर में पेट्रोल 115 और डीजल 100.09 रुपए प्रति लीटर बताया गया है।

रोजाना 530 करोड़ रुपए तक नुकसान का अनुमान

रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुमान के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो IOC, BPCL और HPCL को मिलाकर रोजाना करीब 530 करोड़ रुपए तक का नुकसान हो सकता है। लंबे समय तक क्रूड महंगा रहने पर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव और बढ़ सकता है।

हालांकि, घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव कई कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए क्रूड के महंगे होने का असर खुदरा कीमतों में किस तरह और कब दिखाई देगा, यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता।

पश्चिम एशिया का तनाव बढ़ा रहा चिंता

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख कारकों में शामिल है। ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। बाजार में आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमत भी चिंता

कच्चे तेल के साथ-साथ रिफाइंड ईंधन, खासकर डीजल की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। अमेरिका में डीजल बाजार में बढ़ते दबाव के बीच निर्यात पर संभावित अंकुश जैसे विकल्पों की चर्चा से वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।

फिलहाल पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की संभावना मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों पर निर्भर रहेगी। यदि कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो तेल कंपनियों के लिए मौजूदा खुदरा दरों पर दबाव झेलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।