नई दिल्ली। देश में किशोरियों के स्वास्थ्य को लेकर एक अहम अध्ययन सामने आया है। AIIMS नई दिल्ली की ओर से स्कूल जाने वाली करीब 4 हजार छात्राओं की स्क्रीनिंग की जा रही है। अध्ययन में किशोरियों के बीच मोटापा, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं जैसे पहलुओं का आकलन किया जा रहा है।

अध्ययन के शुरुआती आंकड़ों में कुछ छात्राओं में अनियमित मासिक धर्म और वजन से जुड़ी समस्याएं सामने आई हैं। विशेषज्ञ इन संकेतों को किशोरियों की बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि, खान-पान और स्क्रीन टाइम जैसे पहलुओं के साथ जोड़कर समझने की कोशिश कर रहे हैं।

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क्यों अहम है AIIMS का यह अध्ययन?

किशोरावस्था शरीर में तेजी से होने वाले बदलावों का दौर है। इस उम्र में हार्मोनल बदलावों के कारण मासिक चक्र में कुछ अनियमितताएं हो सकती हैं। ऐसे में किसी एक लक्षण को देखकर PCOS का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

AIIMS के विशेषज्ञों के मुताबिक, किशोरियों में PCOS का आकलन करते समय उम्र, मासिक धर्म का पैटर्न और एंड्रोजन से जुड़े लक्षणों समेत कई चिकित्सकीय पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।

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हर अनियमित पीरियड PCOS नहीं

विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि सिर्फ पीरियड्स अनियमित होने से PCOS की पुष्टि नहीं होती। खासकर पहली माहवारी के बाद शुरुआती वर्षों में मासिक चक्र में बदलाव सामान्य विकास प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं।

इसी वजह से अभिभावकों को बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है।

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स्क्रीन टाइम और कम होती फिजिकल एक्टिविटी भी फोकस में

अध्ययन में किशोरियों की जीवनशैली से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। लंबे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल, शारीरिक गतिविधि में कमी और खान-पान की आदतों में बदलाव किशोरों के समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गए हैं।

विशेषज्ञों का जोर संतुलित भोजन, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि, अच्छी नींद और स्वस्थ जीवनशैली पर है।

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जरूरत वाली छात्राओं की आगे भी होगी निगरानी

AIIMS की इस पहल का उद्देश्य केवल तत्काल स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं है। जिन छात्राओं में स्वास्थ्य संबंधी संकेत मिलते हैं, उन्हें आगे की जांच और निगरानी के लिए बुलाया जा रहा है। इससे किशोरियों के स्वास्थ्य में समय के साथ होने वाले बदलावों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।

अभिभावक किन बातों पर दें ध्यान?

– बच्चे के वजन में अचानक होने वाले बदलाव

– लगातार या असामान्य मासिक धर्म संबंधी समस्या

– शारीरिक गतिविधि में कमी

– नींद और खान-पान की बिगड़ती दिनचर्या

– लंबे समय तक स्क्रीन पर रहना

इनमें से किसी भी एक संकेत को बीमारी का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। लगातार समस्या होने पर बाल रोग विशेषज्ञ या स्त्री रोग विशेषज्ञ से चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

निष्कर्ष: AIIMS का यह अध्ययन किशोरियों के स्वास्थ्य में बढ़ते मेटाबॉलिक और हार्मोनल जोखिमों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी जुटा रहा है। विशेषज्ञों का संदेश साफ है—किशोरावस्था में स्वास्थ्य संबंधी बदलावों को नजरअंदाज न करें, लेकिन बिना उचित जांच के किसी बीमारी का निष्कर्ष भी न निकालें।