पी. कुमार। रायपुर
 
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हालिया दौरे के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अगुवाई वाली सरकार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि साय ने पत्रकारों से बात करते हुए "थोड़ा और इंतजार" करने की बात कही थी, लेकिन भाजपा के अंदरूनी गलियारों में हलचल थमी नहीं है
 
दो मंत्री हटेंगे, दो नए चेहरे जुड़ सकते हैं
 
वर्तमान में राज्य मंत्रिमंडल में दो पद खाली हैं, और सूत्रों के अनुसार संगठन ने नए मंत्रियों को लेकर अपनी रणनीति लगभग तय कर ली है। संभावना जताई जा रही है कि दो मौजूदा मंत्रियों से इस्तीफा लेकर नए चेहरों को शामिल किया जाएगा। हालांकि इस प्रक्रिया में कितना वक्त लगेगा, यह स्पष्ट नहीं है।
 
अमर अग्रवाल और लता उसेंडी हो सकते हैं नई एंट्री
 
बिलासपुर से पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल का नाम सबसे आगे चल रहा है, लेकिन पार्टी के भीतर कुछ विरोधी खेमा उनके मंत्री बनने के पक्ष में नहीं है। वहीं बस्तर से पूर्व मंत्री लता उसेंडी का नाम भी चर्चा में है। बस्तर में भाजपा के पास सिर्फ एक मंत्री केदार कश्यप हैं, ऐसे में वहां से एक और मंत्री बनाए जाने की संभावना है।
 
स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के लिए अनुभवी चेहरों की तलाश
 
बीते डेढ़ साल में स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं, जिससे संगठन अब इन अहम विभागों को अनुभवी नेताओं के हवाले करना चाहता है। ओबीसी वर्ग से पहले ही कई मंत्री होने के कारण अब भाजपा का फोकस आदिवासी और सामान्य वर्ग पर है, जिससे जातीय संतुलन बना रहे।
 
12 दावेदार, केवल 2 कुर्सियां
 
मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच करीब 12 विधायक मंत्री बनने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इनमें रेणुका सिंह, पुरंदर मिश्रा, गजेंद्र यादव, गोमती साय, धरमलाल कौशिक, अमर अग्रवाल, अजय चंद्राकर, राजेश मूणत, विक्रम उसेंडी, लता उसेंडी, सुशांत शक्ला और भावना बोहरा जैसे कई दिग्गज नाम शामिल हैं। अब सबकी निगाहें दिल्ली के निर्णय पर टिकी हैं। संगठन की सहमति मिलते ही विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल का चेहरा कुछ हद तक बदल सकता है।