प्रयागराज। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं के रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। करीब 47 मिनट के संबोधन में उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था ने युवाओं को एक ऐसे चक्रव्यूह में फंसा दिया है, जहां डिग्री हासिल करने के बाद भी रोजगार की गारंटी नहीं है।

 

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राहुल गांधी ने कहा, “परिवारों से लाखों-करोड़ों रुपए फीस के रूप में लिए जाते हैं और बदले में BA-MA की डिग्री मिलती है, लेकिन यह सर्टिफिकेट रोजगार की गारंटी नहीं देता।” उन्होंने दावा किया कि आज हजार युवाओं में से केवल 12 को ही स्थायी नौकरी मिल रही है।

 

‘रील बनाओ, मजदूरी करो, लेकिन नौकरी नहीं मिलेगी’

 

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राहुल गांधी ने युवाओं की स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें कहा जा रहा है कि जितनी रील बनानी है बनाओ, जितनी रील देखनी है देखो, Blinkit और Uber में काम करो या मजदूरी करो, लेकिन स्थायी नौकरी नहीं मिल सकती। उन्होंने इसे “21वीं सदी का नशा” बताते हुए कहा कि युवाओं को वास्तविक रोजगार के अवसरों से दूर किया जा रहा है।

 

कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने मंच पर सात से अधिक छात्र-छात्राओं से बातचीत की और शिक्षा, रोजगार तथा प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवाल पूछे। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 23 जिलों से छात्रों को बुलाया गया था। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की बेटी मिराया भी कार्यक्रम में मौजूद थीं।

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राहुल गांधी ने गिनाए रोजगार के पांच ‘बंद दरवाजे’

 

राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के पांच प्रमुख रास्ते थे, लेकिन ये सभी बंद होते जा रहे हैं।

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पहला- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर: राहुल गांधी ने कहा कि दुनिया में ‘मेड इन चाइना’, ‘मेड इन वियतनाम’ और ‘मेड इन बांग्लादेश’ के उत्पाद आसानी से मिलते हैं, लेकिन ‘मेड इन इंडिया’ उतना दिखाई नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी और गलत तरीके से लागू GST ने देश के मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम को नुकसान पहुंचाया।

 

दूसरा- स्टार्टअप और छोटे कारोबार: उन्होंने सवाल उठाया कि ‘स्टार्टअप इंडिया’ कहां चला गया। राहुल गांधी का आरोप था कि छोटे कारोबारियों और युवाओं को आसानी से बैंक लोन नहीं मिलता, जबकि बड़े उद्योगपतियों को भारी-भरकम कर्ज उपलब्ध कराया जाता है।

 

तीसरा- सरकारी नौकरी: राहुल गांधी ने कहा कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले करीब 150 उम्मीदवारों में से केवल एक युवा को ही नौकरी मिल पाती है। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में युवाओं के लंबे इंतजार और सीमित अवसरों का मुद्दा उठाया।

 

चौथा- पब्लिक सेक्टर: राहुल गांधी ने सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि 2014 से पहले सार्वजनिक क्षेत्र में करीब 14 लाख नौकरियां थीं, जो 2026 में घटकर लगभग सात लाख रह गई हैं।

 

पांचवां- कॉर्पोरेट रोजगार: उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल से कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी नौकरियों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में युवाओं के सामने स्थायी और सुरक्षित रोजगार का संकट और गंभीर होता जा रहा है।

 

राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवाओं को केवल डिग्री नहीं, बल्कि ऐसी शिक्षा और रोजगार व्यवस्था चाहिए, जो उन्हें सम्मानजनक और स्थायी रोजगार का अवसर दे सके।