नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ रही चीनी की कीमतों के बीच उपभोक्ताओं को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार की ओर से 10 लाख टन तक कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की मंजूरी और जमाखोरी के खिलाफ सख्ती के बाद बाजार में कीमतों पर दबाव कम होने लगा है। ब्राजील से आयात की जाने वाली चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारत पहुंच सकती हैं। हालांकि, इस तारीख तक कुल कितनी चीनी देश में आएगी, इसका सटीक अनुमान फिलहाल लगाना मुश्किल है।

राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश नाईकनावारे के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में भारत के लिए चीनी आयात का सबसे व्यावहारिक विकल्प ब्राजील है। थाईलैंड पहले भारत को चीनी की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा है, लेकिन फिलहाल वहां भी घरेलू मांग के कारण चीनी की उपलब्धता सीमित है।

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सरकार की सख्ती का दिखने लगा असर

चीनी की जमाखोरी और बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने निगरानी बढ़ा दी है। शनिवार को हुई खुली निविदाओं में मिलों से निकलने वाली चीनी के भाव में करीब 5 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सरकारी कार्रवाई का असर थोक बाजार पर पड़ना शुरू हो गया है।

सरकार ने 20 अगस्त को घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों के बीच 10 लाख टन तक कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी थी। इससे पहले करीब एक महीने में चीनी के दाम लगभग 24 प्रतिशत तक बढ़कर 56 रुपये से 60 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गए थे।

आयात की प्रक्रिया में लगेंगे कई चरण

ब्राजील से चीनी मंगाने की प्रक्रिया तत्काल पूरी नहीं होती। सबसे पहले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) से मंजूरी और आयात आवंटन की प्रक्रिया होती है। इसके बाद भुगतान के लिए साख पत्र जारी किया जाता है और फिर चीनी तथा जहाज की व्यवस्था की जाती है।

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ब्राजील के बंदरगाहों पर भीड़ और जहाजों की उपलब्धता भी आयात की समयसीमा को प्रभावित कर सकती है। ब्राजील से भारत के बंदरगाहों तक चीनी पहुंचने में सामान्य तौर पर 40 से 45 दिन लगते हैं। इसके बाद कच्ची चीनी को रिफाइनिंग और आगे की प्रक्रिया के लिए मिलों तक पहुंचाया जाता है।

नाईकनावारे ने कहा कि सरकार 31 अक्टूबर तक खेप पहुंचने की समयसीमा को लेकर व्यावहारिक रुख अपना सकती है। यदि कोई खेप निर्धारित अवधि में रवाना हो चुकी है और रास्ते में है, लेकिन कुछ देरी से भारत पहुंचती है, तो उस पर भी विचार किया जा सकता है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक समेत इन राज्यों में पहले पहुंच सकती है चीनी

आयातित कच्ची चीनी सबसे पहले उन राज्यों में पहुंचने की संभावना है, जहां बड़े समुद्री बंदरगाह मौजूद हैं। इनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश प्रमुख हैं। इन राज्यों के बंदरगाहों से चीनी को सड़क और रेल मार्ग के जरिए देश के अन्य हिस्सों में भेजा जाएगा। उत्तर भारत के राज्यों तक भी आयातित चीनी इन्हीं प्रमुख बंदरगाहों के माध्यम से पहुंच सकती है।

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कालाबाजारी रोकने के लिए जांच तेज

जमाखोरी और कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारियों की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में स्टॉक का सत्यापन कर रही हैं। राज्यों को थोक विक्रेताओं, डीलरों और अन्य कारोबारियों के स्टॉक की जांच के लिए निरीक्षण दल गठित करने तथा औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी लोगों से घबराने की अपील करते हुए कहा है कि राज्य में चीनी की कोई कमी नहीं है।