छत्तीसगढ़ शासन ने 13 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ खुली जेल (प्रबंधन एवं संचालन) नियम जारी किए हैं। इन्हीं नियमों के तहत राज्य में ओपन जेलों का संचालन किया जाएगा। यहां बंदियों को सामान्य जेलों की तुलना में अधिक स्वतंत्र और सकारात्मक वातावरण मिलेगा, हालांकि उनकी निगरानी व्यवस्था बनी रहेगी।

परिवार से मुलाकात और काम करने की अधिक स्वतंत्रता

ओपन जेल में चयनित पात्र बंदियों को परिवार से मिलने की अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। वे आसपास के खेतों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में काम कर सकेंगे। इच्छुक बंदियों को लघु व्यवसाय शुरू करने का अवसर भी दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें अपना भोजन स्वयं तैयार करने और सामान्य जीवनशैली अपनाने की सुविधा मिलेगी।

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ओपन जेल में उन्हीं बंदियों को रखा जाएगा जिनका आचरण अच्छा रहा हो और जिनसे गंभीर अपराध की पुनरावृत्ति की आशंका कम हो। इसी वजह से यहां सामान्य जेलों की तुलना में सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत कम कठोर होगी।

चार सदस्यीय हाई पावर कमेटी करेगी चयन

ओपन जेल में हर बंदी को प्रवेश नहीं मिलेगा। सामान्य तौर पर ऐसे बंदियों को पात्र माना जाएगा, जिन्होंने अपनी सजा का महत्वपूर्ण हिस्सा अनुशासन बनाए रखते हुए पूरा किया हो। साथ ही उनका सामाजिक व्यवहार और पृष्ठभूमि भी सकारात्मक होना जरूरी होगा। पात्र बंदियों के चयन के लिए जेल मुख्यालय में चार सदस्यीय हाई पावर कमेटी गठित की जाएगी। इस कमेटी के अध्यक्ष जेल डीजी होंगे।

ITI और कौशल प्रशिक्षण से रोजगार की राह

ओपन जेलों में बंदियों को ITI, कौशल विकास केंद्रों, कौशल विकास संस्थानों, ओपन स्कूल और IGNOU जैसी संस्थाओं से जोड़ने की योजना है। इससे बंदियों को शिक्षा और रोजगारपरक प्रशिक्षण हासिल करने का अवसर मिलेगा।

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बेमेतरा के पथर्रा स्थित ओपन जेल में ITI की स्थापना की जाएगी। पहले चरण में यहां फैब्रिकेशन ट्रेड शुरू किया जाएगा। बंदियों को वेल्डिंग, सोल्डरिंग और मेटल बेंडिंग के साथ स्टील अलमारी, स्टील रैक सहित अन्य उपयोगी सामान बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें जेल उद्योग में रोजगार उपलब्ध कराने की योजना है।

रिहाई के बाद भी आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

बंदियों को जेल से बाहर आने के बाद दोबारा अपराध की दुनिया में जाने से रोकने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए रिहाई के बाद भी सहायता देने की योजना है। इच्छुक बंदियों को इंडियन ओवरसीज बैंक के माध्यम से ऋण और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है, ताकि वे रोजगार या स्वरोजगार शुरू कर सकें।

मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक रिश्तों पर भी जोर

जेल डीजी हिमांशु गुप्ता के मुताबिक, ओपन जेल का उद्देश्य केवल बंदियों को अधिक स्वतंत्रता देना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर और जिम्मेदार जीवन के लिए तैयार करना है। खुले वातावरण में रहने, काम करने और परिवार के संपर्क में रहने से बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार, पारिवारिक संबंधों की मजबूती और समाज के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होने की उम्मीद है।

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ओपन जेल की यह व्यवस्था बंदियों के लिए सजा के बाद सामान्य जीवन में लौटने की एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। कौशल, रोजगार और पारिवारिक जुड़ाव के जरिए उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा में वापस लाने पर जोर दिया जा रहा है।