बिलासपुर। प्रदेश के शासकीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में रिक्त शैक्षणिक पदों पर अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। वित्त विभाग से अनुमति मिलने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने अतिथि व्याख्याताओं की भर्ती के संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। नियुक्तियां छत्तीसगढ़ अतिथि व्याख्याता नीति-2024 (संशोधित-2026) के प्रावधानों के अनुसार की जाएंगी।

इस व्यवस्था के तहत शासकीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल और क्रीड़ाधिकारी के रिक्त पदों पर अतिथि कर्मियों की सेवाएं ली जाएंगी। लंबे समय से अतिथि व्याख्याता संघ एकमुश्त 57 हजार रुपये मासिक मानदेय की मांग कर रहा था। हालांकि, शासन ने 2 हजार रुपये प्रति कार्य दिवस और अधिकतम 50 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय की अनुमति दी है।

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अलग-अलग पदों के लिए अलग मानदेय

अतिथि व्याख्याताओं के लिए न्यूनतम शैक्षणिक अर्हता यूजीसी के वर्ष 2018 के निर्धारित नियमों के अनुरूप होगी। अतिथि शिक्षण सहायक, ग्रंथपाल सहायक और क्रीड़ा सहायक के लिए स्नातकोत्तर स्तर पर न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक अनिवार्य होंगे। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अंक 50 प्रतिशत निर्धारित किए गए हैं।

मानदेय की व्यवस्था इस प्रकार रहेगी

अतिथि व्याख्याता: 2,000 रुपये प्रतिदिन, अधिकतम 50,000 रुपये प्रतिमाह।

अतिथि ग्रंथपाल/क्रीड़ाधिकारी: 1,600 रुपये प्रतिदिन, अधिकतम 40,000 रुपये प्रतिमाह।

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अतिथि शिक्षण सहायक: 1,400 रुपये प्रतिदिन, अधिकतम 35,000 रुपये प्रतिमाह।

अतिथि ग्रंथपाल सहायक/क्रीड़ा सहायक: 1,200 रुपये प्रतिदिन, अधिकतम 30,000 रुपये प्रतिमाह।

शासन ने स्पष्ट किया है कि अतिथि व्याख्याताओं को विश्वविद्यालय या महाविद्यालय की नियमित स्थापना का हिस्सा नहीं माना जाएगा और वे लोक सेवक की विधि-विहित परिभाषा के अंतर्गत नहीं आएंगे।

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15 दिन लगातार अनुपस्थित रहे तो सेवा समाप्त

निर्देशों के अनुसार यदि कोई अतिथि व्याख्याता लगातार 15 दिनों तक अनुपस्थित रहता है तो उसकी व्यवस्था स्वतः समाप्त मानी जाएगी। इसकी कार्रवाई संबंधित संस्था प्रमुख द्वारा की जाएगी। अतिथि कर्मियों को संस्था में अनुशासन बनाए रखना और संस्था प्रमुख के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।

अध्यापन के अलावा भी निभानी होंगी जिम्मेदारियां

अतिथि व्याख्याताओं को केवल कक्षाओं का संचालन ही नहीं करना होगा, बल्कि संस्था प्रमुख के निर्देशानुसार प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा, छात्रसंघ चुनाव, विभिन्न योजनाओं का संचालन, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, क्रीड़ा गतिविधियां, युवा उत्सव, अतिरिक्त परीक्षाओं के संचालन एवं मूल्यांकन तथा नैक मूल्यांकन से जुड़े कार्यों में भी सहयोग करना होगा।

शैक्षणिक सत्र के दौरान अध्यापन या अन्य कार्यों को लेकर शिकायत मिलने पर संबंधित अतिथि कर्मी की सेवाएं तत्काल समाप्त की जा सकती हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें आगामी शैक्षणिक सत्रों में अध्यापन कार्य के लिए भी अपात्र किया जा सकता है।

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