रायपुर। प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए लागू की जा रही रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत अब औद्योगिक उपभोक्ताओं के यहां भी स्मार्ट मीटर लगाने की तैयारी तेज हो गई है। योजना के तहत कृषि कनेक्शनों को छोड़कर सभी श्रेणियों के बिजली उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

घरेलू उपभोक्ताओं और सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम पहले से जारी है। अब बिजली वितरण कंपनी की नजर हाईटेंशन (एचटी) औद्योगिक कनेक्शनों पर है। सूत्रों के अनुसार, स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य कर रही मौजूदा एजेंसियां—टाटा पावर, जीनस सहित अन्य कंपनियों—को ही औद्योगिक कनेक्शनों का काम सौंपे जाने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए अलग से नई निविदा (टेंडर) जारी नहीं किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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4200 से अधिक एचटी कनेक्शन, राजस्व का बड़ा आधार

प्रदेश में 11 केवी या उससे अधिक वोल्टेज पर बिजली लेने वाले 4200 से अधिक हाईटेंशन औद्योगिक कनेक्शन हैं। बिजली वितरण कंपनी के कुल राजस्व का आधे से अधिक हिस्सा इन्हीं उपभोक्ताओं से प्राप्त होता है। ऐसे में कंपनी इन कनेक्शनों की निगरानी, बिलिंग और ऊर्जा प्रबंधन को और अधिक डिजिटल एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में काम कर रही है।

गाइडलाइन और प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल

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औद्योगिक कनेक्शनों में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना को लेकर विशेषज्ञों और जानकारों ने कुछ सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि आरडीएसएस की शुरुआती गाइडलाइन में उल्लेख था कि एचटी औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए उपयुक्त स्मार्ट मीटर उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके लिए ऑटोमैटिक मीटर रीडिंग (एएमआर) प्रणाली अपनाई गई थी। ऐसे में अब बिना अलग तकनीकी मूल्यांकन और नई प्रक्रिया के स्मार्ट मीटर लगाने की तैयारी कई तकनीकी और प्रक्रियागत प्रश्न खड़े कर रही है।

फिलहाल एएमआर सिस्टम से होती है पूरी निगरानी

वर्तमान में प्रदेश के सभी हाईटेंशन औद्योगिक कनेक्शन एएमआर (ऑटोमैटिक मीटर रीडिंग) प्रणाली से जुड़े हुए हैं। इस सिस्टम के माध्यम से उद्योगों की बिजली खपत की ऑनलाइन निगरानी की जाती है और उसी आधार पर बिल तैयार होते हैं। मीटर से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर तत्काल अलर्ट मिल जाता है। इससे कर्मचारियों को मौके पर जाकर मीटर रीडिंग लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती और पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होती है।

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