पी. कुमार । रायपुर/

भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश सरकार बने ढाई साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी निगम, मंडल, आयोग और बोर्ड के कई महत्वपूर्ण पद अब तक खाली हैं। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को लंबे समय से दूसरी नियुक्ति सूची का इंतजार है, लेकिन फिलहाल इसके जल्द जारी होने के संकेत नजर नहीं आ रहे हैं।

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बीते साल अप्रैल में नवरात्रि के दौरान पहली सूची जारी की गई थी। उस समय उम्मीद जताई जा रही थी कि जल्द ही दूसरी सूची भी सामने आएगी, लेकिन समय बीतता गया और पूरा एक साल निकल गया। अब राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नियुक्तियों का इंतजार और लंबा खिंच सकता है।
 
राष्ट्रीय स्तर के फैसलों के बाद ही आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
 
पार्टी सूत्रों के अनुसार, फिलहाल भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में बदलाव और नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया चल रही है। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम और प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति के बाद ही छत्तीसगढ़ में लंबित राजनीतिक नियुक्तियों पर चर्चा आगे बढ़ सकती है। माना जा रहा है कि नए प्रदेश प्रभारी के साथ विचार-विमर्श के बाद ही निगम, मंडल और आयोगों के शेष पदों पर नियुक्तियां होंगी।
 
संसदीय सचिव पदों पर भी टिकी विधायकों की नजर
 
प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार के बाद जिन विधायकों को मंत्री पद नहीं मिल सका, उनकी नजर अब संसदीय सचिवों के पदों पर टिकी हुई है। हालांकि सरकार के कार्यकाल का आधा समय गुजरने के बावजूद इन पदों पर भी अब तक अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन नियुक्तियों के लिए भी अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।
 
कई अहम संस्थानों में पद खाली
 
प्रदेश के जिन प्रमुख निगमों, मंडलों और आयोगों में अभी नियुक्तियां लंबित हैं, उनमें लघु वनोपज सहकारी संघ, वित्त आयोग, केश शिल्प बोर्ड, मत्स्य महासंघ, हथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ सहित कई संस्थाएं शामिल हैं। इसके अलावा चार शक्कर कारखानों में अध्यक्ष पद खाली हैं। इसी तरह रायपुर विकास प्राधिकरण और छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में उपाध्यक्ष और सदस्य पदों पर भी नियुक्तियां बाकी हैं। कुल मिलाकर करीब तीन दर्जन पदों पर राजनीतिक नियुक्तियां होनी हैं, जिन पर भाजपा नेताओं की नजर टिकी हुई है।
 
संगठन और कार्यकर्ताओं में बढ़ रही बेचैनी
 
लंबे इंतजार के कारण पार्टी के भीतर भी चर्चा तेज हो गई है। कई नेता और कार्यकर्ता संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने के बावजूद अब तक जिम्मेदारी नहीं मिलने से नाराज बताए जा रहे हैं। ऐसे में आगामी नियुक्तियां भाजपा के भीतर संतुलन और संगठनात्मक समीकरण तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।