बिलासपुर। ग्राम पंचायत मोहरा के पीपल चौक में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक जीवन का महत्व बताया जा रहा है। कथा के दौरान आचार्य पंडित चंद्रशेखर महाराज जी ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सदैव अच्छे संस्कारों का पालन करना चाहिए। संस्कारयुक्त जीवन जीने वाला व्यक्ति न केवल स्वयं सुख और शांति का अनुभव करता है, बल्कि उसके आचरण से परिवार और समाज में भी सकारात्मक वातावरण निर्मित होता है। उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए मनुष्य को अपने दैनिक जीवन में धर्म और सदाचार को अपनाना चाहिए।

ये खबर भी पढ़ें…
अहोई अष्टमी पर संतान की लंबी उम्र के लिए माताएं रखेंगी व्रत, जानें कब करें अहोई माता की पूजा
अहोई अष्टमी पर संतान की लंबी उम्र के लिए माताएं रखेंगी व्रत, जानें कब करें अहोई माता की पूजा
हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का पर्व संतान की सुख-समृद्धि, अच्छी सेहत और लंबी उम्र की कामना से जुड़ा है।...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

 ब्रह्म मुहूर्त में उठना और नियमित पूजा-पाठ करना जरूरी

आचार्य पंडित चंद्रशेखर महाराज जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन धर्म में दैनिक दिनचर्या का विशेष महत्व बताया गया है। मनुष्य को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने दैनिक कार्यों से निवृत्त होना चाहिए। इसके बाद यज्ञ, पूजा-पाठ और तर्पण जैसे धार्मिक कार्यों को नियमित रूप से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं का पालन करने से मनुष्य के जीवन में सकारात्मकता आती है और उसका मन ईश्वर के प्रति समर्पित होता है।

आचार्य श्री ने कहा कि गाय माता की सेवा भी सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी मानी गई है। प्रत्येक व्यक्ति को भोजन करने से पहले गाय माता को रोटी खिलानी चाहिए। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी नहीं है, बल्कि जीवों के प्रति करुणा, दया और सेवा भाव का भी प्रतीक है। जो व्यक्ति अपने जीवन में सेवा, दया और धर्म को स्थान देता है, उसके प्रति ईश्वर सदैव प्रसन्न रहते हैं।

ये खबर भी पढ़ें…
वित्त मंत्री ने रायगढ़ में तीर्थयात्रा से लौटे 981 वरिष्ठ नागरिकों का किया सम्मान
वित्त मंत्री ने रायगढ़ में तीर्थयात्रा से लौटे 981 वरिष्ठ नागरिकों का किया सम्मान
रायपुर, 31 अक्टूबर 2026/ वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन केवल...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

 जहां होती है श्रीमद्भागवत कथा, वह स्थान बन जाता है तीर्थ

श्रीमद्भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आचार्य चंद्रशेखर महाराज जी ने कहा कि जिस स्थान पर भगवान श्रीहरि की कथा का आयोजन होता है, वह स्थान तीर्थ के समान पवित्र हो जाता है। कथा का आयोजन करना और उसका श्रवण करना दोनों ही बड़े सौभाग्य की बात है। यह अवसर उन्हीं लोगों को प्राप्त होता है, जिनके हृदय में भगवान के प्रति प्रेम, श्रद्धा और भक्ति का भाव होता है।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करने वाला आध्यात्मिक माध्यम है। कथा में भगवान की लीलाओं, भक्तों के चरित्र और धर्म के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से जीवन के महत्वपूर्ण संदेश दिए जाते हैं। इन संदेशों को आत्मसात कर व्यक्ति अपने व्यवहार और विचारों में सुधार ला सकता है।

ये खबर भी पढ़ें…
स्थानीय कारीगरों की मेहनत से रोशन हो हर घर, स्वदेशी दीयों से मनाएं दीपावली–राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा
स्थानीय कारीगरों की मेहनत से रोशन हो हर घर, स्वदेशी दीयों से मनाएं दीपावली–राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा
रायपुर, 31 अक्टूबर 2026/दीपावली का पर्व घरों को रोशन करने के साथ दूसरों के जीवन में खुशियां लाने का भी...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

 कथा श्रवण से मनुष्य के जीवन में आता है सकारात्मक परिवर्तन

आचार्य श्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य के हृदय में भक्ति और सद्भावना का संचार होता है। भगवान की कथा सुनने मात्र से व्यक्ति के मन में अच्छे विचार उत्पन्न होते हैं और उसे अपने जीवन में धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अनायास ही कथा श्रवण कर लेता है, तो उसे भी इसका आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। कथा श्रवण को पापों से मुक्ति और आत्मशुद्धि का माध्यम माना गया है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने व्यस्त जीवन में से कुछ समय निकालकर धार्मिक आयोजनों में शामिल हों। श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से मिलने वाली शिक्षाओं को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने जीवन में भी उतारें। इससे मनुष्य के भीतर अहंकार, लोभ, क्रोध और द्वेष जैसी बुराइयों को दूर करने की प्रेरणा मिलती है।

 धर्म और संस्कारों से मजबूत होता है परिवार और समाज

आचार्य चंद्रशेखर महाराज जी ने कहा कि आज के समय में बच्चों और युवाओं को संस्कारों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। परिवार में धार्मिक वातावरण, बड़ों का सम्मान, सेवा भाव और सत्य के मार्ग पर चलने की शिक्षा बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। श्रीमद्भागवत कथा जैसे आयोजन समाज को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।

ये खबर भी पढ़ें…
आज का राशिफल 1 नवंबर 2026: रविवार को चमकेगी इन 5 राशियों की किस्मत, जानें सभी 12 राशियों का हाल
आज का राशिफल 1 नवंबर 2026: रविवार को चमकेगी इन 5 राशियों की किस्मत, जानें सभी 12 राशियों का हाल
आज 1 नवंबर 2026, रविवार है। रविवार का दिन सूर्य देव और सूर्य ग्रह को समर्पित माना जाता है। ज्योतिष...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सदैव अच्छे कर्म करने चाहिए और दूसरों के प्रति प्रेम, दया तथा सद्भाव बनाए रखना चाहिए। धर्म का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य को सदाचारी बनाना और उसे ईश्वर के प्रति समर्पित करना है।

ग्राम पंचायत मोहरा के पीपल चौक में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक चिंतन और भक्ति का अवसर बन रहा है। आचार्य श्री के प्रवचनों से श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिल रही है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र कथा के श्रवण का अवसर जीवन में बार-बार नहीं मिलता, इसलिए श्रद्धालुओं को इसे अपने जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम बनाना चाहिए।