धान खरीदी में बदला टोकन का गणित, अब रकबे के हिसाब से मिलेगी पर्ची छोटे किसानों को मिलेगा एक टोकन, 2 से 10 एकड़ तक के किसानों को दो और 10 एकड़ से अधिक रकबे वालों को अधिकतम तीन टोकन

धान खरीदी की तैयारी कर रहे किसानों के लिए इस बार टोकन व्यवस्था में बदलाव किया गया है। शासन ने पहले की तरह सभी किसानों को समान रूप से तीन टोकन जारी करने की व्यवस्था में परिवर्तन करते हुए अब कृषि रकबे के आधार पर टोकन की संख्या निर्धारित की है। नई व्यवस्था का सीधा असर किसानों की धान बिक्री की योजना पर पड़ेगा। खासकर छोटे और सीमांत किसानों को अब एक ही टोकन के माध्यम से अपनी उपज बेचने की तैयारी करनी होगी।

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नई व्यवस्था के तहत लघु एवं सीमांत किसानों को एक टोकन, दो से 10 एकड़ तक कृषि भूमि वाले किसानों को दो टोकन और 10 एकड़ से अधिक जमीन वाले दीर्घ कृषकों को अधिकतम तीन टोकन जारी किए जाएंगे। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए पहले से बेहतर योजना बनानी होगी। टोकन की संख्या तय होने के बाद धान बिक्री की प्रक्रिया में किसानों को अपने रकबे के अनुसार ही आगे बढ़ना होगा।

पुरानी व्यवस्था में हुआ बदलाव

पिछले वर्षों में किसान तीन टोकन मिलने की व्यवस्था के आधार पर धान बिक्री की योजना बनाते थे। अलग-अलग टोकन के जरिए वे अपनी सुविधा के अनुसार उपज बेचने की तैयारी कर लेते थे। लेकिन इस बार रकबे के आधार पर टोकन जारी होने से पुरानी व्यवस्था बदल गई है। अब किसानों को यह समझना होगा कि उनके पंजीकृत कृषि रकबे के अनुसार कितने टोकन मिलेंगे और उसी हिसाब से धान खरीदी केंद्र में उपज पहुंचाने की योजना बनानी होगी।

पंजीकृत रकबे की जांच जरूरी

धान खरीदी के नए नियमों में टोकन की संख्या सीधे कृषि रकबे से जुड़ी है। ऐसे में किसानों के लिए पंजीकृत जमीन का विवरण महत्वपूर्ण हो गया है। रकबे में अंतर या रिकॉर्ड संबंधी त्रुटि होने पर टोकन की श्रेणी को लेकर परेशानी हो सकती है। किसानों को धान बिक्री की तैयारी से पहले अपने पंजीयन और कृषि भूमि के रिकॉर्ड का मिलान कर लेना चाहिए।

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नियमों की जानकारी लेकर पहुंचें खरीदी केंद्र

नई टोकन व्यवस्था को लेकर अभी भी कई किसानों के बीच जानकारी का अभाव है। ऐसे में किसानों को टोकन कटवाने से पहले अपनी श्रेणी, पंजीकृत रकबे और निर्धारित टोकन संख्या की जानकारी लेना जरूरी होगा। समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए इस बार किसानों को केवल उत्पादन और खरीदी केंद्र की क्षमता ही नहीं, बल्कि टोकन के नए गणित को भी समझना होगा। नियमों की सही जानकारी और पंजीकृत रकबे की जांच से धान बिक्री के दौरान होने वाली संभावित परेशानियों से बचा जा सकता है।