भारतीय थाली में एक ही मील में दाल-चावल के साथ रोटी, राजमा-चावल के साथ रोटी या छोले के साथ भटूरे खाना आम है। इनमें से कोई एक चीज खाना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन एक ही मील में जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ शामिल करने से कुल कार्ब्स और कैलोरी बढ़ सकती है। इसे आमतौर पर ‘डबल कार्बिंग’ कहा जाता है। खासकर रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की अधिकता लंबे समय में वजन बढ़ने, ब्लड शुगर और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती है।

क्या है डबल कार्बिंग?

सीनियर डाइटीशियन अमृता मिश्रा के मुताबिक, एक ही मील में कार्बोहाइड्रेट से भरपूर दो खाद्य पदार्थों को साथ खाना डबल कार्बिंग कहलाता है। जैसे रोटी के साथ चावल, पास्ता के साथ गार्लिक ब्रेड या नूडल्स के साथ फ्राइज। हालांकि, सिर्फ दो कार्ब सोर्स होना अपने आप में नुकसानदायक नहीं है; मात्रा और खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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डबल कार्बिंग और ज्यादा कार्ब्स में अंतर

डबल कार्बिंग में ध्यान इस बात पर होता है कि एक मील में कार्बोहाइड्रेट के कितने सोर्स शामिल हैं। वहीं, ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाने का संबंध शरीर की जरूरत से अधिक कुल कार्ब्स लेने से है। उदाहरण के लिए 5-6 रोटियां खाना एक ही कार्ब सोर्स से भी ज्यादा कार्ब सेवन हो सकता है।

दाल-चावल को डबल कार्बिंग क्यों नहीं माना जाता?

दाल में कार्बोहाइड्रेट के साथ प्रोटीन और फाइबर भी अच्छी मात्रा में होते हैं, जबकि चावल मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट का स्रोत है। इसलिए दाल-चावल को सामान्य तौर पर डबल कार्बिंग नहीं माना जाता। हालांकि, दोनों की मात्रा बहुत ज्यादा होने पर कुल कार्बोहाइड्रेट बढ़ सकता है।

हर कार्बोहाइड्रेट का शरीर पर असर एक जैसा नहीं

कार्बोहाइड्रेट की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है। चीनी, मिठाई और शुगरी ड्रिंक्स जैसे सिंपल कार्ब्स जल्दी पचकर ब्लड शुगर बढ़ा सकते हैं। वहीं साबुत अनाज, ओट्स, दालें और फलियों में फाइबर अधिक होने के कारण ये अपेक्षाकृत धीरे पचते हैं। हाई-GI खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर तेजी से बढ़ाते हैं, जबकि लो-GI खाद्य पदार्थ इसे धीरे बढ़ाते हैं।

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दो कार्ब सोर्स साथ खाने पर क्या होता है?

कार्बोहाइड्रेट पचने के बाद ग्लूकोज में बदलते हैं और शरीर इसका इस्तेमाल ऊर्जा के लिए करता है। जब एक मील में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा, खासकर रिफाइंड कार्ब्स, ज्यादा होती है तो ब्लड ग्लूकोज तेजी से बढ़ सकता है। इसके जवाब में पैंक्रियाज इंसुलिन रिलीज करता है, जो ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है।

क्या रोटी-चावल साथ खाने से वजन बढ़ता है?

सिर्फ रोटी और चावल को साथ खाने से वजन नहीं बढ़ता। वजन बढ़ने का मुख्य कारण लंबे समय तक शरीर की जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेना है। यदि रोटी-चावल सीमित मात्रा में हों और साथ में दाल, सब्जी, सलाद व पर्याप्त प्रोटीन लिया जाए तो भोजन को संतुलित रखा जा सकता है।

रोज ज्यादा रिफाइंड कार्ब्स से बढ़ सकता है डायबिटीज का जोखिम

हर दिन जरूरत से ज्यादा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट लेने पर ब्लड शुगर बार-बार तेजी से बढ़ सकता है। लंबे समय तक ऐसी डाइट इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम से जुड़ी हो सकती है। इसलिए कार्ब्स की मात्रा के साथ उनकी गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है।

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चावल छोड़ने की जरूरत नहीं

चावल को पूरी तरह डाइट से हटाने की जरूरत नहीं है। इसकी मात्रा उम्र, शारीरिक गतिविधि, कुल डाइट और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय की जानी चाहिए। रोटी और चावल दोनों खाने हों तो दोनों की मात्रा नियंत्रित रखें और थाली में सब्जियां, प्रोटीन और सलाद की हिस्सेदारी बढ़ाएं।

डबल कार्बिंग से बचने के आसान तरीके

एक मील में कार्बोहाइड्रेट के कई बड़े हिस्से लेने से बचें।

रोटी-चावल दोनों लेने हैं तो दोनों की मात्रा कम रखें।

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प्लेट में दाल, पनीर, अंडा, मछली या अन्य प्रोटीन स्रोत शामिल करें।

हरी सब्जियों और सलाद की मात्रा बढ़ाएं।

सफेद ब्रेड, मैदा, मीठे पेय और अन्य रिफाइंड कार्ब्स सीमित करें।

अपनी शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार भोजन की मात्रा तय करें।

वजन, ब्लड शुगर या अन्य मेटाबॉलिक समस्या होने पर डाइटिशियन की सलाह लें।