मुंबई। एजेंसी। हरियाणा के IAS अधिकारी अशोक खेमका की तरह महाराष्ट्र कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे भी अपने लगातार तबादलों और सख्त प्रशासनिक रवैये के लिए चर्चित रहे हैं। 2005 बैच के अधिकारी मुंढे का 21 साल की सेवा में 25वां तबादला हुआ है। हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) का आयुक्त नियुक्त किया है।

महाराष्ट्र सरकार ने हाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए पांच वरिष्ठ IAS अधिकारियों के तबादले किए। इसी आदेश के तहत तुकाराम मुंढे को FDA कमिश्नर की जिम्मेदारी सौंपी गई। खास बात यह है कि पिछले दो महीनों में ही उनका यह दूसरा तबादला है।

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इससे पहले अप्रैल में उन्हें दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव पद से हटाकर आपदा प्रबंधन, राहत एवं पुनर्वास विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया था। हालांकि, कार्यभार संभालने से पहले ही उनके तबादले पर रोक लगा दी गई। इसके चलते मुंढे को करीब एक महीने तक बिना किसी पोस्टिंग के रहना पड़ा। अब सरकार ने उन्हें FDA की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है।

साधारण परिवार से निकलकर बने IAS

तुकाराम मुंढे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताडसोना गांव में हुआ था। वे सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। शुरुआती शिक्षा जिला परिषद स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने औरंगाबाद से उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होंने इतिहास में स्नातक और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। वर्ष 2005 में UPSC परीक्षा पास कर वे IAS अधिकारी बने।

मुंढे की पहली पोस्टिंग सोलापुर में हुई थी। वहां उन्होंने अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ अभियान चलाकर कई ठिकानों पर कार्रवाई की। उनके सख्त रवैये और त्वरित कार्रवाई ने उन्हें जल्द ही जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया।

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इसी अंदाज ने दिलाया ‘सिंघम’ नाम

तुकाराम मुंढे अपने बेबाक और कड़े प्रशासनिक रवैये के लिए जाने जाते हैं। उन्हें ‘सिंघम’ और ‘मैन ऑफ मिशन’ जैसे नाम भी दिए गए हैं। उनकी छवि ऐसे अधिकारी की रही है जो नियमों के पालन और प्रशासनिक कार्रवाई में किसी तरह का समझौता नहीं करते।

मुंढे के कार्यकाल के दौरान अवैध गतिविधियों, अतिक्रमण, भ्रष्टाचार और माफिया के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं। इसी वजह से कई बार स्थानीय राजनीतिक नेताओं के साथ उनके मतभेद भी चर्चा में रहे हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि लगातार तबादलों के बावजूद उन्होंने अपने काम करने के तरीके में बदलाव नहीं किया।

काम के लिए मिल चुके हैं सम्मान

तुकाराम मुंढे को उनके प्रशासनिक कार्यों के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें बेहतर प्रशासनिक कार्यों के लिए ‘बेस्ट कलेक्टर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। जल संरक्षण के क्षेत्र में उनके काम के लिए उन्हें ‘वॉटरमैन ऑफ महाराष्ट्र’ के नाम से भी जाना जाता है।

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मुंढे का करियर ऐसे अधिकारी की छवि के साथ आगे बढ़ा है, जिसने अलग-अलग पदों पर रहते हुए अपने सख्त और नियम-केंद्रित प्रशासनिक रवैये को प्राथमिकता दी। यही वजह है कि उनके लगातार तबादले भी उनकी पहचान का हिस्सा बन चुके हैं।