नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्य के सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि आगामी जनगणना 2027 की हाउस लिस्टिंग और मकानों की गणना के आधार पर संपत्ति कर की वसूली सुनिश्चित की जाए।
विभाग के उपसचिव भागवत जायसवाल के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी आदेश को “सर्वोच्च प्राथमिकता” श्रेणी में रखा गया है। आदेश 25 बिंदुओं पर आधारित है और इसका उद्देश्य संपत्तियों के बदलते उपयोग तथा नए निर्माणों के बावजूद रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने से हो रहे राजस्व नुकसान को रोकना बताया गया है।
क्यों लिया गया फैसला?
विभागीय समीक्षा में पाया गया कि कई नगरीय निकायों में नई संपत्तियों और उपयोग परिवर्तन का रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं हो रहा है। इससे संपत्ति कर की वसूली प्रभावित हो रही है।
सरकार का मानना है कि संपत्ति कर नगरीय निकायों की सबसे महत्वपूर्ण “स्वयं-स्रोत” आय है। इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग जलापूर्ति, सड़क, स्वच्छता, उद्यान और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में किया जाएगा।

जनगणना डेटा से होगा मिलान
जनगणना 2027 के दौरान प्रत्येक भवन को नया “भवन क्रमांक” दिया जाएगा। इस क्रमांक का मिलान नगरीय निकायों की मौजूदा प्रॉपर्टी आईडी से किया जाएगा, ताकि रिकॉर्ड से बाहर संपत्तियों की पहचान की जा सके।
यदि जनगणना के आंकड़ों और निकायों के रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है, तो दोबारा भौतिक सत्यापन कराया जाएगा।
डिजिटल डेटाबेस तैयार करने की योजना
जनगणना से प्राप्त डिजिटल डेटा को निकायों के संपत्ति कर पोर्टल और सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा। इससे भविष्य के लिए एकीकृत और सटीक डिजिटल प्रॉपर्टी डेटाबेस तैयार होगा।
व्यावसायिक उपयोग वाली संपत्तियों पर विशेष नजर
सरकार विशेष रूप से उन आवासीय संपत्तियों की जांच करेगी जिनका उपयोग आंशिक या पूर्ण रूप से व्यावसायिक गतिविधियों में हो रहा है, जैसे:
दुकान
क्लिनिक
कोचिंग सेंटर
कार्यालय
ऐसी संपत्तियों से अब व्यावसायिक दर पर संपत्ति कर वसूला जाएगा।
अधिकारियों की जिम्मेदारी तय
हर वार्ड और क्षेत्र के लिए अलग-अलग अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्हें डेटा की शुद्धता और कर योग्य संपत्तियों की पहचान सुनिश्चित करनी होगी।
 

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