रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़े धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा खुलासा किया है। ईडी के अधिकृत बयान के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ओएसडी रहे चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में 170 ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 66.64 लाख रुपए जमा हुए। जांच एजेंसी का दावा है कि यह रकम पीएससी भर्ती में कथित बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले उत्कर्ष चंद्राकर से जुड़ी है। दोनों के बीच कई वित्तीय लेनदेन के साक्ष्य भी मिलने की बात ईडी ने कही है।

ईडी के अनुसार, इसी मामले में रायपुर, दुर्ग, भिलाई, धमतरी और जशपुर में एक सितंबर को पांच स्थानों पर तलाशी ली गई थी। इनमें तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में ओएसडी रहे और वर्तमान में बलरामपुर में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ चेतन बोरघरिया से जुड़े परिसर भी शामिल थे। इसके बाद 11 सितंबर को उन्हें गिरफ्तार कर रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से छह दिन की न्यायिक रिमांड मिली।

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अभ्यर्थियों से तीन करोड़ से अधिक लेने का दावा

ईडी ने बताया कि पीएससी भर्ती मामले में कथित बिचौलिए उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने सीजीपीएससी स्टेट सर्विस एग्जाम 2021 के अलग-अलग अभ्यर्थियों से तीन करोड़ रुपए से अधिक की कथित अवैध रकम ली। जांच एजेंसी के मुताबिक, अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन सुनिश्चित कराने का भरोसा दिया गया था। इसके लिए आरोपियों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में अपनी कथित पहुंच और प्रभाव का इस्तेमाल किया।

जांच में ईडी को यह भी पता चला कि उस समय मुख्यमंत्री कार्यालय में ओएसडी के रूप में पदस्थ चेतन बोरघरिया के नाम और आधिकारिक पद का कथित तौर पर इस्तेमाल अभ्यर्थियों में भरोसा पैदा करने के लिए किया गया था।

डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक जांच में लेनदेन के साक्ष्य

तलाशी के दौरान चेतन बोरघरिया से जुड़े परिसरों से मोबाइल फोन सहित कई डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए। ईडी के मुताबिक, इनकी फोरेंसिक जांच में चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच वित्तीय लेनदेन तथा रकम लौटाने और भुगतान की मांग से संबंधित बातचीत सामने आई है।

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जांच एजेंसी ने मेसर्स फिगरकेव ई-कॉम (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कुछ वित्तीय लेनदेन का भी पता लगाया है। ईडी को आशंका है कि इस कंपनी का इस्तेमाल कथित तौर पर धन की लेयरिंग और उसके मूवमेंट के लिए किया गया।

डिजिटल और बैंकिंग साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तारी

ईडी के अनुसार, जांच में जुटाए गए डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग लेनदेन और पीएमएलए-2002 के तहत दर्ज बयानों से चेतन बोरघरिया की कथित संलिप्तता सामने आई। एजेंसी का दावा है कि अपराध से संबंधित रकम को हासिल करने, अपने कब्जे में रखने, छिपाने और इस्तेमाल करने जैसी गतिविधियों में उनकी भूमिका रही। इसी आधार पर उन्हें पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। मामले की जांच अभी जारी है।

पर्चा लीक के दौरान खाते में जमा हुई रकम

ईडी ने दावा किया कि पीएससी भर्ती 2020-21 के कथित लीक प्रश्नपत्र कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले उपलब्ध कराए गए थे। जांच के मुताबिक, प्रारंभिक परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में एकत्र किया गया, जहां कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र बांटे गए। इसके बाद उन्हें बारनवापारा सैंक्चुरी के एक रिजॉर्ट में ठहराया गया, जहां मेन्स परीक्षा से संबंधित कथित लीक प्रश्नपत्रों के आधार पर तैयारी कराई गई।

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इसी अवधि के वित्तीय लेनदेन की जांच में चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में 170 ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 66.64 लाख रुपए जमा होने की जानकारी सामने आई। ईडी के अनुसार, इस दौरान चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कई वित्तीय लेनदेन भी हुए। मामले में आगे की जांच जारी है।