बिलासपुर। नए शिक्षा सत्र की शुरुआत हुए एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन बिलासपुर जिले के हजारों विद्यार्थियों को अब तक सभी विषयों की पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसका असर सरकारी स्कूलों के साथ-साथ निजी स्कूलों के विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। कई सरकारी स्कूलों में छात्रों को महत्वपूर्ण विषयों की किताबें नहीं मिली हैं, जबकि बिल्हा ब्लॉक के 91 और मस्तूरी ब्लॉक के 28 निजी स्कूलों तक पहली से दसवीं कक्षा की एक भी सरकारी पाठ्य पुस्तक नहीं पहुंची है।

स्थिति यह है कि निजी स्कूल प्रबंधन ने पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए अभिभावकों से बाजार से किताबें खरीदने को कहा है। इससे पालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ा है।

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राज्य सरकार पहली से दसवीं कक्षा तक सभी वर्गों के विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराती है। इसके वितरण की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम को सौंपी गई है। इस वर्ष नौवीं और दसवीं की पुस्तकें सीधे हाई स्कूलों तक भेजी गईं, जबकि प्राथमिक और मिडिल स्कूलों को डिपो से पुस्तकें लेने के निर्देश दिए गए थे। गर्मी की छुट्टियों के दौरान ही वितरण की तैयारी शुरू कर दी गई थी, ताकि स्कूल खुलते ही बच्चों को किताबें मिल जाएं, लेकिन व्यवस्था समय पर सफल नहीं हो सकी।

पुस्तकों की कमी को देखते हुए जिला शिक्षा विभाग ने पाठ्य पुस्तक निगम को अतिरिक्त पुस्तकों की मांग भेजी थी। इसके बाद दूसरे चरण की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। इस बार नई व्यवस्था के तहत हर ब्लॉक में चार से पांच वितरण केंद्र बनाए गए हैं, जहां शुक्रवार तक किताबें पहुंचा दी गईं।

संकुल समन्वयकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन केंद्रों से पुस्तकें उठाकर सोमवार तक सभी संबंधित स्कूलों में वितरण सुनिश्चित करें। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि दूसरे चरण की सप्लाई के बाद अधिकांश स्कूलों में पाठ्य पुस्तकों की कमी दूर हो जाएगी, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रूप से शुरू हो सकेगी। हालांकि अभिभावकों और विद्यार्थियों का कहना है कि सत्र शुरू होने के एक महीने बाद किताबें मिलना शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

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