भारतीय आबादी में क्रॉनिक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) ऐसी प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जिनका असर अब बड़ी संख्या में लोगों पर देखा जा रहा है। चिंता की बात यह है कि कई लोगों में दोनों बीमारियां एक साथ पाई जा रही हैं। इससे दिल, रक्त वाहिकाओं और किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

हालिया अध्ययन के मुताबिक, भारत में करीब 5 प्रतिशत वयस्क एक ही समय में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे हैं। यानी लगभग हर 20 में से एक वयस्क इन दोनों स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि 40 साल की उम्र के बाद दोनों बीमारियों के एक साथ होने का खतरा तेजी से बढ़ता है।

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40 के बाद बढ़ता है खतरा

अध्ययन के अनुसार, डायबिटीज और हाई BP के एक साथ होने की आशंका करीब 40 वर्ष की उम्र के आसपास बढ़ने लगती है। यह जोखिम लगभग 58 वर्ष की उम्र तक बढ़ता रहता है और 70 वर्ष की उम्र तक करीब 17 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर होता दिखाई देता है।

डायबिटीज से पीड़ित लोगों में हाई ब्लड प्रेशर होने की संभावना लगभग चार गुना अधिक बताई गई है। वहीं, हाई BP वाले लोगों में डायबिटीज होने का खतरा करीब 2.5 गुना अधिक देखा गया है।

दोनों बीमारियां साथ हों तो क्यों बढ़ता है खतरा?

डायबिटीज में लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। दूसरी ओर, हाई ब्लड प्रेशर लगातार रक्त वाहिकाओं और हृदय पर दबाव डालता है। जब दोनों समस्याएं एक साथ मौजूद हों तो शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव और बढ़ सकता है।

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ऐसी स्थिति में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और क्रोनिक किडनी डिजीज जैसी गंभीर जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है। उपलब्ध शोध में दोनों बीमारियों की संयुक्त व्यापकता का अनुमान 46.13 प्रतिशत तक भी सामने आया है, हालांकि यह आंकड़ा संबंधित अध्ययन की आबादी और परिभाषाओं के संदर्भ में समझा जाना चाहिए।

क्यों होती हैं दोनों बीमारियां एक साथ?

एक ही व्यक्ति में डायबिटीज और हाई BP होने के पीछे कई साझा जोखिम कारक हो सकते हैं। अधिक वजन, शारीरिक गतिविधि की कमी और असंतुलित खानपान इनमें प्रमुख हैं। उम्र बढ़ने के साथ भी इन बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।

इसलिए डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति को केवल ब्लड शुगर की जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर भी जांचना चाहिए। इसी तरह हाई BP वाले लोगों को समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराते रहना चाहिए।

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डॉक्टरों की सलाह: लाइफस्टाइल पर दें ध्यान

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि के जरिए डायबिटीज और हाई BP से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।

भोजन में नमक और अत्यधिक कैलोरी वाली चीजों की मात्रा सीमित रखें।

नियमित रूप से व्यायाम या शारीरिक गतिविधि करें।

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वजन को स्वस्थ सीमा में बनाए रखने की कोशिश करें।

ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कराते रहें।

यदि डॉक्टर ने डायबिटीज या हाई BP की दवा शुरू की है तो बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा बंद न करें।

नियमित जांच और निर्धारित उपचार को नजरअंदाज न करें।

विशेषज्ञों का जोर इस बात पर है कि डायबिटीज और हाई BP को अलग-अलग समस्याओं के बजाय व्यक्ति के समग्र हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के संदर्भ में देखा जाए। समय पर जांच, उपचार और जीवनशैली में सुधार से गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।