रायपुर। 13 साल पुराने झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में 10 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ गई है। जगदलपुर की NIA विशेष अदालत ने मृत्युदंड की पुष्टि के लिए मामले को हाईकोर्ट भेज दिया है। हाईकोर्ट में इसे क्रिमिनल रेफरेंस/डेथ रेफरेंस के रूप में दर्ज किया गया है।

अब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ट्रायल कोर्ट के फैसले, दोषसिद्धि के आधार, पेश किए गए साक्ष्यों और मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं की स्वतंत्र समीक्षा करेगी। कानून के मुताबिक, ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई मौत की सजा हाईकोर्ट की पुष्टि के बिना अंतिम रूप से लागू नहीं होती।

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झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सलियों ने हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 27 से 29 के बीच बताई गई है; स्थानीय रिपोर्टों में 29 मृतकों का उल्लेख है।

करीब 13 साल तक चले मामले में जगदलपुर की NIA विशेष अदालत ने 5 सितंबर 2026 को सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद 16 सितंबर 2026 को अदालत ने सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।

अब डेथ रेफरेंस पर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट के पूरे रिकॉर्ड और साक्ष्यों की जांच होगी। इसके साथ ही दोषियों को हाईकोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील का अधिकार भी है।

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