किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके क्रेडिट कार्ड पर बकाया कर्ज को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच अक्सर असमंजस की स्थिति बन जाती है। कई लोगों को लगता है कि मृतक का क्रेडिट कार्ड कर्ज पति-पत्नी, बच्चों या माता-पिता को अपनी जेब से चुकाना होगा। हालांकि, सामान्य तौर पर ऐसा नहीं है।

क्रेडिट कार्ड से लिया गया कर्ज अनसिक्योर्ड लोन (असुरक्षित कर्ज) माना जाता है। ऐसे में कानूनी उत्तराधिकारी व्यक्तिगत रूप से इस कर्ज के लिए जिम्मेदार नहीं होते। बैंक या कार्ड जारी करने वाली कंपनी बकाया राशि की वसूली मृतक द्वारा छोड़ी गई संपत्ति यानी एस्टेट से कर सकती है।

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एस्टेट से पहले चुकाया जाता है कर्ज:

मृतक के बैंक खाते में जमा रकम, एफडी, म्यूचुअल फंड, जमीन, मकान और अन्य संपत्तियां उसकी एस्टेट का हिस्सा हो सकती हैं। मृतक की देनदारियों का निपटारा उसकी उपलब्ध संपत्ति से किया जाता है। उत्तराधिकारियों की जिम्मेदारी सामान्य तौर पर उन्हें विरासत में मिली संपत्ति की सीमा तक ही होती है।

संपत्ति कम और कर्ज ज्यादा होने पर:

अगर मृतक की संपत्ति की कुल कीमत क्रेडिट कार्ड के बकाये से कम है, तो उपलब्ध एस्टेट से भुगतान किया जाएगा। इसके बाद बची हुई राशि की व्यक्तिगत वसूली सामान्यतः कानूनी उत्तराधिकारियों से नहीं की जा सकती। बैंक अपनी नीतियों और लागू नियमों के तहत शेष राशि को राइट-ऑफ कर सकता है।

वसीयत होने पर क्या होगा?

यदि मृतक ने वसीयत छोड़ी है, तो उसके एग्जीक्यूटर की जिम्मेदारी होती है कि संपत्ति के वितरण से पहले वैध देनदारियों का निपटारा किया जाए। कर्ज चुकाने के बाद बची संपत्ति वसीयत के अनुसार वारिसों को दी जाती है।

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वसीयत नहीं होने पर:

बिना वसीयत मृत्यु की स्थिति में संपत्ति का निपटारा लागू उत्तराधिकार कानून के अनुसार होता है। जरूरत पड़ने पर अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासक संपत्ति और देनदारियों का प्रबंधन कर सकता है।

कब परिवार पर आ सकती है व्यक्तिगत जिम्मेदारी?

अगर क्रेडिट कार्ड या संबंधित कर्ज में कोई व्यक्ति को-एप्लीकेंट, ज्वाइंट अकाउंट होल्डर या सह-देयदार है, तो उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी बन सकती है। ऐसी स्थिति में केवल मृतक की एस्टेट ही नहीं, बल्कि जीवित सह-देयदार की जिम्मेदारी भी नियमों के अनुसार तय हो सकती है।

वहीं, ऐड-ऑन कार्ड इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की स्थिति अलग होती है। ऐड-ऑन कार्ड आमतौर पर मुख्य कार्डधारक के खाते से जुड़ा होता है। इसलिए केवल ऐड-ऑन कार्डधारक होने से वह व्यक्ति स्वतः मुख्य कर्जदार नहीं बन जाता।

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बैंक को तुरंत दें सूचना:

परिवार को मृत्यु के बाद संबंधित बैंक या कार्ड कंपनी को जल्द से जल्द सूचना देनी चाहिए और मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना चाहिए। साथ ही, किसी भी भुगतान या दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले बैंक से लिखित रूप में बकाये और निपटान की स्थिति स्पष्ट कर लेना बेहतर है।