रायपुर/नई दिल्ली। ₹2,000 से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के साथ कारोबारी जगत में भी विरोध तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने इस फैसले पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था का संचालन खर्च व्यापारियों पर डालना उचित नहीं है।

सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि एमडीआर का बोझ आम ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस संबंध में भुगतान मंचों और यूपीआई से जुड़े हितधारकों के साथ चर्चा की जा रही है। मंत्रालय यह सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था तैयार कर रहा है कि व्यापारी ग्राहकों से इस शुल्क की वसूली न करें।

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चेम्बर सौंपेगा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष सतीश थौरानी ने कहा कि एक ओर उपभोक्ताओं के लिए डिजिटल लेनदेन को शून्य शुल्क पर रखने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर एमडीआर का भार व्यापारियों पर डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए व्यापारियों पर अतिरिक्त संचालन लागत डालना उचित नहीं है।

चेम्बर इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय नेतृत्व और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) को ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहा है। व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई भुगतान अब रोजमर्रा के कारोबार का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में शुल्क लागू होने से छोटे और कम मार्जिन पर काम करने वाले कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है।

छोटे व्यापारियों पर ₹3 से ₹5 हजार तक अतिरिक्त बोझ का दावा

दिल्ली के सदर बाजार के बारी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने दावा किया कि ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगने से छोटे व्यापारियों पर महीने में करीब ₹3,000 से ₹5,000 तक का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। उनका कहना है कि इससे दुकानदार और ग्राहक दोनों नकदी भुगतान की ओर रुख कर सकते हैं।

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हालांकि, कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि एमडीआर का छोटे दुकानदारों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार, व्यापारी भुगतान के लिए रुपे डेबिट कार्ड जैसे विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

मेरठ के सूरजकुंड स्पोर्ट्स मार्केट के एक दुकानदार ने बताया कि खेल सामान की कीमत अधिक होने के कारण उसकी करीब 80 प्रतिशत बिक्री में ₹2,000 से अधिक का भुगतान होता है। उनका कहना है कि ग्राहक के पास नकदी नहीं होने पर दुकानदार के लिए यूपीआई भुगतान स्वीकार करना जरूरी हो जाता है।

छोटे कारोबारियों को राहत

एनपीसीआई के अनुसार, महीने में यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए ₹1 लाख तक का संग्रह करने वाले छोटे व्यापारी इस शुल्क से मुक्त रहेंगे। गांवों और कस्बों में व्यापारियों को किए जाने वाले यूपीआई क्यूआर भुगतानों पर भी एमडीआर लागू नहीं होगा। एनपीसीआई का कहना है कि चुनिंदा बड़े मूल्य के लेनदेन पर शुल्क लगाने का उद्देश्य यूपीआई इकोसिस्टम के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल तैयार करना है।

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अमेरिकी दबाव के आरोपों को सरकार ने खारिज किया

बड़े मूल्य के यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने के फैसले को अमेरिकी दबाव से जोड़ने के आरोपों को वित्त मंत्रालय ने खारिज किया है। मंत्रालय के मुताबिक, एनपीसीआई के दिशानिर्देशों में यूपीआई पर क्रेडिट कार्ड के जरिए लेनदेन के लिए केवल रुपे क्रेडिट कार्ड की अनुमति है। मंत्रालय ने कहा कि इस व्यवस्था से विदेशी क्रेडिट कार्ड को कोई विशेष लाभ नहीं मिलेगा।

वहीं, विपक्षी दलों ने इस फैसले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर झूठ और भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। सरकार का कहना है कि एमडीआर का उद्देश्य यूपीआई व्यवस्था के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल तैयार करना है और इसका सीधा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा।

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