धार्मिक दृष्टि से भाद्रपद मास बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका तीज और गणेशोत्सव जैसे बड़े पर्व मनाए जाएंगे। वहीं अजा एकादशी, ऋषि पंचमी, राधाष्टमी, परिवर्तिनी एकादशी, वामन जयंती और अनंत चतुर्दशी जैसे महत्वपूर्ण व्रत एवं त्योहार भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहेंगे।

भाद्रपद मास की शुरुआत के साथ ही धार्मिक आयोजनों और व्रत-त्योहारों का सिलसिला तेज हो गया है। मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पूरे महीने भगवान श्रीकृष्ण, भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान विष्णु की आराधना के विभिन्न पर्व मनाए जाएंगे।

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4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि की मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने कंस के अत्याचारों से लोगों को मुक्ति दिलाने और धर्म की स्थापना के लिए अवतार लिया था।

जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की विशेष पूजा की जाती है। श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर भगवान कृष्ण का स्मरण करते हैं। घरों और मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है तथा बाल गोपाल को झूला झुलाने की परंपरा निभाई जाती है। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के समय विशेष पूजा, आरती और भोग लगाया जाता है। इसके बाद श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करते हैं। इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी।

हरतालिका तीज पर महिलाएं रखेंगी निर्जला व्रत

भाद्रपद मास में आने वाली हरतालिका तीज का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित युवतियां मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त करने की कामना से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।

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परंपरा के अनुसार महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं और अन्न एवं जल ग्रहण नहीं करतीं। भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। कई स्थानों पर रातभर जागरण, भजन और कीर्तन का आयोजन भी होता है। अगले दिन पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है। इस वर्ष हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा।

14 सितंबर से शुरू होगा 10 दिवसीय गणेशोत्सव

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से गणेशोत्सव की शुरुआत होती है। यह पर्व लगातार 10 दिनों तक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है।

भक्त गणपति बप्पा से सुख, समृद्धि, बुद्धि और मंगल की कामना करते हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ गणेशोत्सव का समापन होता है। वर्ष 2026 में गणेशोत्सव 14 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर को गणेश विसर्जन के साथ संपन्न होगा।

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भाद्रपद मास 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहार

तारीख

दिन

व्रत/त्योहार

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29 अगस्त 2026

शनिवार

भाद्रपद मास का प्रारंभ

4 सितंबर

शुक्रवार

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

7 सितंबर

सोमवार

अजा एकादशी

11 सितंबर

शुक्रवार

भाद्रपद अमावस्या

14 सितंबर

सोमवार

हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी और गणेशोत्सव का शुभारंभ

15 सितंबर

मंगलवार

ऋषि पंचमी व्रत

17 सितंबर

गुरुवार

ज्येष्ठा गौरी/गौरी पूजा

19 सितंबर

शनिवार

राधाष्टमी

22 सितंबर

मंगलवार

परिवर्तिनी एकादशी व्रत

23 सितंबर

बुधवार

वामन जयंती एवं वामन अवतार प्राकट्य दिवस

25 सितंबर

शुक्रवार

अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन

26 सितंबर

शनिवार

भाद्रपद पूर्णिमा, मास का समापन और पितृ पक्ष का प्रारंभ

भाद्रपद मास में पड़ने वाले इन व्रतों और त्योहारों के कारण सितंबर का महीना धार्मिक आयोजनों और आस्था से सराबोर रहेगा। श्रद्धालु पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से पूरे माह विभिन्न देवी-देवताओं की आराधना करेंगे।