रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक और भ्रष्टाचार से जुड़े धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। ईडी ने मंगलवार को रायपुर, दुर्ग, भिलाई, धमतरी और जशपुर जिले में पांच स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।

कार्रवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व निज सचिव केके चंद्रवंशी तथा तत्कालीन ओएसडी और वर्तमान में बलरामपुर में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ चेतन बोरघरिया से जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली गई। ईडी ने बुधवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में दावा किया कि जांच के दौरान सीजीपीएससी-2021 परीक्षा के कथित रूप से लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों से करोड़ों रुपये वसूले गए। जांच में उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर के नाम सामने आए हैं। ईडी के अनुसार, दोनों ने प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन में मदद का भरोसा देकर उम्मीदवारों से नकद में 3 करोड़ रुपये से अधिक की रकम हासिल की। जांच एजेंसी का दावा है कि इस राशि में से करीब 2.80 करोड़ रुपये अनिल चंद्राकर को दिए गए।

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रिश्तेदारों और चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए प्रश्नपत्र!

ईडी ने आरोप लगाया है कि सीजीपीएससी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र निजी दलालों के माध्यम से आरोपियों के रिश्तेदारों और चुनिंदा उम्मीदवारों तक गैरकानूनी तरीके से पहुंचाए गए। इसके बदले रिश्वत ली गई। एजेंसी के अनुसार, इस कथित नेटवर्क के कारण डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी समेत वरिष्ठ पदों पर चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई।

हालांकि इन आरोपों और चयन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच विभिन्न जांच एजेंसियों के स्तर पर जारी है।

EOW-ACB और CBI की FIR के आधार पर शुरू हुई जांच

ईडी ने बताया कि उसने ईओडब्ल्यू-एसीबी रायपुर और सीबीआई-एसीबी रायपुर की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर धन शोधन मामले की जांच शुरू की थी। ये एफआईआर सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और अन्य के खिलाफ 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, हेरफेर और भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित हैं।

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उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी का भी जिक्र

ईडी के अनुसार, इस मामले में 3 जून 2026 को भी तलाशी कार्रवाई की गई थी। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फोन से प्राप्त जानकारी, बैंक खातों के विश्लेषण तथा पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों के आधार पर एजेंसी ने उत्कर्ष चंद्राकर की कथित भूमिका की जांच की।

ईडी का आरोप है कि उत्कर्ष चंद्राकर अपराध से अर्जित आय से जुड़े लेनदेन, उसे प्राप्त करने, रखने, छिपाने, हस्तांतरित करने और वैध संपत्ति के रूप में दर्शाने की गतिविधियों में शामिल था। एजेंसी ने इस मामले में उसकी गिरफ्तारी की जानकारी भी दी है।

प्रभाव और पद का इस्तेमाल कर वसूली का आरोप

ईडी ने अपने बयान में आरोप लगाया कि उत्कर्ष चंद्राकर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अपने रिश्तेदार और पूर्व निज सचिव केके चंद्रवंशी के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर नौकरी के इच्छुक लोगों को प्रभावित किया और उनसे रकम वसूली। मंगलवार की तलाशी कार्रवाई के दौरान ईडी ने कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से संबंधित कागजात और जांच से जुड़े अन्य साक्ष्य जब्त करने की जानकारी दी है। एजेंसी ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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