रायपुर। छत्तीसगढ़ की स्थानीय भाषा और संस्कृति को स्कूली शिक्षा से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने पहल शुरू कर दी है। प्रदेश के स्कूलों में कक्षा पहली से 12वीं तक छत्तीसगढ़ी को स्वतंत्र विषय के रूप में पढ़ाने की संभावनाओं पर मंथन शुरू हो गया है। शासन के निर्देश पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने इसके लिए पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

प्रारंभिक तौर पर सीबीएसई स्कूलों को छोड़कर प्रदेश के अन्य स्कूलों में इसे लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में दो दिन पहले एससीईआरटी में पहली बैठक हुई। इसमें भाषाविदों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों, शिक्षा मंडल के प्रतिनिधियों, निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों समेत विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हुए। बैठक में छत्तीसगढ़ी को स्वतंत्र विषय के रूप में शामिल करने को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई।

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एक-दो जिलों से शुरू हो सकता है पायलट प्रोजेक्ट

बैठक में कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि यदि पूरे प्रदेश में एक साथ छत्तीसगढ़ी विषय लागू करने में व्यावहारिक कठिनाइयां आती हैं तो शुरुआत एक-दो जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की जा सकती है। वहां के अनुभव और परिणामों के आधार पर इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू करने पर विचार किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय भाषा को शिक्षा से जोड़ने से बच्चों में छत्तीसगढ़ी के प्रति रुचि और लगाव बढ़ेगा। अपनी स्थानीय भाषा में सीखने और समझने की क्षमता भी मजबूत होगी। इसके साथ ही नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी अधिक मजबूती से जुड़ सकेगी।

भाषा के साथ संस्कृति और महापुरुष भी पाठ्यक्रम में

प्रस्तावित पाठ्यक्रम में केवल छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य को ही शामिल करने की योजना नहीं है। इसमें छत्तीसगढ़ की संस्कृति, लोककला, लोक परंपराएं, तीज-त्योहार, लोकगीत, लोककथाएं और प्रदेश के महापुरुषों से संबंधित विषयों को भी स्थान देने पर विचार किया जा रहा है। कक्षा के स्तर के अनुसार अध्ययन सामग्री तैयार की जाएगी, ताकि बच्चों को स्थानीय परिवेश और विरासत की जानकारी सहज तरीके से मिल सके।

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एससीईआरटी बैठक में मिले सुझावों और आगे विशेषज्ञों के साथ होने वाले विचार-विमर्श के आधार पर शासन को प्रस्ताव भेजेगा। शासन से मंजूरी मिलने के बाद कक्षा पहली से 12वीं तक अलग-अलग स्तर के लिए पाठ्यक्रम और अध्ययन सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

नई शिक्षा नीति के अनुरूप स्थानीय संदर्भ पर जोर

छत्तीसगढ़ी को स्कूली शिक्षा में शामिल करने की कवायद नई शिक्षा नीति के अनुरूप राज्य के पाठ्यक्रम में स्थानीय संदर्भ को शामिल करने की प्रक्रिया के बीच शुरू हुई है। एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम को छत्तीसगढ़ की जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालने का काम भी चल रहा है। आगामी शिक्षा सत्र से कक्षा पांचवीं और आठवीं में नया पाठ्यक्रम लागू किया जाना प्रस्तावित है। इसी क्रम में बच्चों को स्थानीय भाषा और संस्कृति से जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ी को शिक्षा व्यवस्था में स्थान देने पर विचार किया जा रहा है।

शिक्षक प्रशिक्षण और परीक्षा व्यवस्था भी होगी तय

छत्तीसगढ़ी को स्वतंत्र विषय के रूप में लागू करने की स्थिति में केवल पाठ्यक्रम तैयार करना ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण, नियुक्ति और परीक्षा व्यवस्था भी विकसित करनी होगी। विषय पढ़ाने के लिए आवश्यक शिक्षकों की उपलब्धता और नियुक्ति की नीति पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों के मूल्यांकन के लिए परीक्षा पद्धति तय करने की जरूरत होगी।

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