रायपुर। संतान सुख की चाह रखने वाले निःसंतान दंपतियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर में इसी महीने एडवांस्ड आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) सेंटर शुरू होने जा रहा है। इसके साथ ही एम्स छत्तीसगढ़ का पहला सरकारी अस्पताल बन जाएगा, जहां आधुनिक आईवीएफ सुविधा उपलब्ध होगी।

सबसे बड़ी बात यह है कि निजी अस्पतालों में जहां आईवीएफ उपचार पर 2 से 4 लाख रुपए तक खर्च करना पड़ता है, वहीं एम्स में यह सुविधा एक लाख रुपए से कम लागत में उपलब्ध कराने की तैयारी है। इससे महंगे इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। फिलहाल मरीजों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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एम्स के निदेशक डॉ. अशोक जिंदल ने बताया कि आईवीएफ सेंटर के लिए आवश्यक सभी आधुनिक सुविधाएं विकसित कर ली गई हैं और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की टीम भी तैयार है। इलाज की दरें तय करने के लिए चिकित्सा अधीक्षक और गायनिक विभाग के विशेषज्ञों की समिति काम कर रही है। उनका कहना है कि इस सेंटर का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय दंपतियों को किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है।

सहायक प्रजनन तकनीक का मिला विशेष प्रशिक्षण

एम्स की प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सरिता अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान समय में बांझपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। आईवीएफ सेंटर शुरू करने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्टाफ को सहायक प्रजनन तकनीक (ART) का व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया गया है। देशभर के विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया ताकि मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं मिल सकें।

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कैंसर मरीजों के लिए भी होगी विशेष सुविधा

एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि कई बार निःसंतान दंपतियों की जांच के दौरान महिलाओं में ओवरी कैंसर का पता चलता है, जिसके कारण ओवरी निकालनी पड़ती है और मातृत्व की संभावना समाप्त हो जाती है। नई आईवीएफ लैब में महिलाओं के अंडाणु और पुरुषों के स्पर्म को लंबे समय तक सुरक्षित रखने (क्रायोप्रिजर्वेशन) की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे भविष्य में मां-बाप बनने की उम्मीद बरकरार रह सकेगी।

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