मानसून और उसके बाद के महीनों में मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हर साल अगस्त से अक्टूबर के बीच डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले बढ़ते हैं। भारत के कई राज्यों में भी इस दौरान डेंगू के मामले सामने आते हैं। वहीं, पड़ोसी देश बांग्लादेश में डेंगू का प्रकोप गंभीर रूप लेता नजर आ रहा है।

बांग्लादेश पहले से ही खसरे के गंभीर प्रकोप से जूझ रहा है। इसी बीच डेंगू ने भी स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस साल अब तक बांग्लादेश में डेंगू के 90 हजार से ज्यादा मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है, जबकि 281 लोगों की मौत हो चुकी है। अक्टूबर में संक्रमण की रफ्तार और तेज होने से चिंता बढ़ गई है।

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बीमारी की देर से पहचान बन रही बड़ी चुनौती

डेंगू के बढ़ते मामलों के साथ सबसे बड़ी चिंता बीमारी की समय पर पहचान और उपचार को लेकर है। एक समीक्षा में सामने आया कि डेंगू से जान गंवाने वाले एक तिहाई से अधिक मरीजों की अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर मौत हो गई।

कई मरीजों में डेंगू की सही पहचान होने में भी देरी हुई। कुछ मामलों में बीमारी का पता चलने से पहले तीन दिन या उससे अधिक समय बीत गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इलाज में देरी गंभीर मामलों और मौत के जोखिम को बढ़ा सकती है।

चारों डेंगू सेरोटाइप एक्टिव

मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. एबीएम अब्दुल्ला के मुताबिक, बार-बार डेंगू संक्रमण और बीमारी की पहचान में देरी गंभीर मामलों की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। जिन लोगों को पहले डेंगू हो चुका है, उनमें दोबारा संक्रमण होने पर बीमारी गंभीर होने का खतरा बढ़ सकता है।

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बांग्लादेश में इस समय डेंगू वायरस के चारों प्रमुख सेरोटाइप—DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4 सक्रिय बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि पहले डेंगू से संक्रमित हो चुके लोगों को भी भविष्य में होने वाले संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा रहा।

दूसरी बार संक्रमण में बढ़ सकता है गंभीर बीमारी का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, पहली बार डेंगू संक्रमण कई लोगों में हल्का या बिना स्पष्ट लक्षणों के भी हो सकता है। ऐसे में लोग इसे सामान्य वायरल या फ्लू समझ सकते हैं। लेकिन बाद में होने वाला संक्रमण कुछ मामलों में अधिक गंभीर हो सकता है।

विशेष रूप से दूसरे संक्रमण के दौरान गंभीर डेंगू का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए तेज बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, कमजोरी या रक्तस्राव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी जाती है।

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अक्टूबर में बढ़ी चिंता

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अक्टूबर में ही बांग्लादेश में 10,736 डेंगू मरीज अस्पताल में भर्ती हुए, जबकि 36 लोगों की मौत हुई। संक्रमण की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।

281 मौतें, सालाना आंकड़ों में चौथे स्थान पर

बांग्लादेश में इस साल अब तक डेंगू से हुई 281 मौतें देश में किसी एक साल में दर्ज मौतों के लिहाज से चौथा सबसे बड़ा आंकड़ा बताया जा रहा है।

बांग्लादेश में वर्ष 2000 में पहला बड़ा डेंगू प्रकोप सामने आया था। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में डेंगू से सबसे ज्यादा 1,705 लोगों की मौत हुई थी।

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119 मौतों की हुई समीक्षा

संक्रामक बीमारियों की निगरानी और जांच से जुड़ी संस्था इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी डिजीज कंट्रोल एंड रिसर्च (IEDCR) ने डेंगू से हुई मौतों की समीक्षा की है।

आईईडीसीआर के निदेशक प्रोफेसर क्वाजी अहमद जाकी के नेतृत्व में हुई समीक्षा में 119 मौतों का अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि डेंगू से जान गंवाने वाले एक तिहाई से अधिक मरीजों की अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर ही मौत हो गई।

रिपोर्ट में बीमारी की पहचान में देरी को भी गंभीर चिंता के रूप में सामने रखा गया। ऐसे में विशेषज्ञों ने समय पर जांच, लक्षणों की पहचान और उपचार को डेंगू से होने वाली गंभीर जटिलताओं और मौतों को कम करने के लिए अहम बताया है।