अंबिकापुर। अफ्रीकन स्वाइन फीवर से बचाव के लिए देश में तैयार की गई पहली स्वदेशी वैक्सीन का छत्तीसगढ़ में फील्ड ट्रायल सफल रहा है। अंबिकापुर के सकालो स्थित शासकीय सुकर फार्म में करीब छह महीने तक 50 अलग-अलग प्रजाति और उम्र के सुकरों पर वैक्सीन का परीक्षण किया गया। परीक्षण के दौरान सुकरों में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

यह ट्रायल आईसीएआर-एनआईएचएसएडी, भोपाल के वैज्ञानिकों की निगरानी में मार्च 2026 से शुरू किया गया था। वैज्ञानिकों ने परीक्षण के अलग-अलग चरणों में सुकरों के रक्त के नमूने लिए। इन नमूनों की जांच भोपाल स्थित हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज लैब में की गई। परीक्षण के परिणामों में वैक्सीन के बाद सुकरों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने की पुष्टि हुई।

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वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सेंथिल और डॉ. फतेह के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने ट्रायल की निगरानी की। स्थानीय स्तर पर पशु चिकित्सक डॉ. सीके मिश्रा और डॉ. अजय अग्रवाल ने भी परीक्षण में सहयोग किया। वैज्ञानिकों ने संभागायुक्त नरेंद्र दुग्गा से मुलाकात कर सकालो फार्म में हुए परीक्षण और इसके परिणामों की जानकारी दी।

16 जुलाई को देश को समर्पित की गई वैक्सीन

स्वदेशी वैक्सीन को 16 जुलाई को आईसीएआर के फाउंडेशन डे के अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश को समर्पित किया था। अब वैक्सीन को बाजार में उपलब्ध कराने की दिशा में आगे की प्रक्रिया की तैयारी चल रही है। इसके अगले छह महीने से एक साल के भीतर उपलब्ध होने की संभावना जताई गई है।

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संक्रमण में मृत्यु दर 100 फीसदी तक

अफ्रीकन स्वाइन फीवर का भारत में पहला मामला वर्ष 2020 में सामने आया था। इसके बाद यह बीमारी कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में फैल गई। पूर्वोत्तर भारत में इसका व्यापक प्रभाव देखा गया। गंभीर संक्रमण के मामलों में सुकरों की मृत्यु दर 100 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। अब तक बीमारी से बचाव के लिए प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने के कारण इसके नियंत्रण में बड़ी चुनौती रही है।

छत्तीसगढ़ में 250 से ज्यादा सुकरों को मारना पड़ा

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अफ्रीकन स्वाइन फीवर का संक्रमण फैलने पर बीमारी को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत संक्रमित क्षेत्र के सुकरों को मारना पड़ता है। छत्तीसगढ़ में संक्रमण के दौरान बलौदाबाजार के सुकर फार्म में करीब 100 और दुर्ग के फार्म में करीब 150 सुकरों को मारना पड़ा था।

पशु चिकित्सकों के अनुसार, वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने से बीमारी के प्रकोप के दौरान सुकर पालकों को पशुधन के साथ बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। स्वदेशी वैक्सीन के बाजार में उपलब्ध होने के बाद बीमारी के कारण होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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