भाई-बहन के पवित्र प्रेम और स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व इस वर्ष शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर पड़ रहे इस पर्व को लेकर ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार रक्षाबंधन भद्रा से मुक्त रहेगा। ऐसे में बहनें पूरे दिन शुभ मुहूर्त में भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।

ज्योतिषियों के अनुसार राखी बांधने के लिए सुबह 5.46 बजे से रात 9.02 बजे तक अलग-अलग शुभ मुहूर्त रहेंगे। इनमें सुबह से दोपहर तक सर्वश्रेष्ठ और अमृतकाल सहित कई शुभ समय बताए गए हैं। विशेष रूप से सुबह 5.46 बजे से दोपहर 2.03 बजे तक राखी बांधना अत्यंत शुभ माना गया है। हालांकि, दिनभर राखी बांधी जा सकती है।

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इस बार रक्षाबंधन भद्रा रहित

श्रीशंकराचार्य आश्रम, बोरियाकला के प्रमुख आचार्य दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद तीर्थ महाराज ने बताया कि श्रावण शुक्ल चतुर्दशी यानी गुरुवार, 27 अगस्त को पूर्णिमा तिथि का प्रवेश सुबह करीब 8.33 बजे होगा। पूर्णिमा तिथि शुक्रवार, 28 अगस्त को सुबह करीब 9.19 बजे तक रहेगी। इसलिए रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को ही मनाया जाना शास्त्रसम्मत है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में रक्षासूत्र बांधने का विधान मध्यान्हकाल में बताया गया है। रक्षा पोटली में अक्षत यानी चावल और स्वर्ण का अंश रखने की परंपरा भी वर्णित है। हालांकि, भद्रा काल में रक्षासूत्र बांधने का निषेध माना गया है। इस वर्ष भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी, इसलिए रक्षाबंधन पर भद्रा की कोई बाधा नहीं रहेगी।

श्रावणी उपाकर्म और संस्कृत दिवस भी

धर्मशास्त्री पंडित चंद्रभूषण शुक्ला के अनुसार भविष्य पुराण में रक्षाबंधन के दिन गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, कावेरी, सरयू और क्षिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान, तर्पण और दान का विशेष महत्व बताया गया है। तीर्थस्थल पर जाना संभव न हो तो घर के पवित्र जल में सभी तीर्थों का स्मरण कर स्नान करने से भी पुण्य लाभ मिलता है।

श्रावण पूर्णिमा के दिन ब्राह्मण समाज में श्रावणी उपाकर्म की परंपरा निभाई जाती है। इसी अवसर पर संस्कृत दिवस भी मनाया जाता है। इस तरह 28 अगस्त का दिन धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।

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