नई दिल्ली बीमारियों के इलाज का बढ़ता खर्च आम आदमी की जेब पर लगातार भारी पड़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने और स्वास्थ्य बीमा को अधिक सुलभ बनाने के लिए केंद्र सरकार और बीमा नियामक इरडा (IRDAI) बड़े सुधारों की दिशा में काम कर रहे हैं। प्रस्तावित सुधारों में इलाज की मानकीकृत दरें तय करने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा एक्सचेंज को बढ़ावा देने और एक समान स्वास्थ्य बीमा उत्पाद लागू करने की योजना शामिल है।

उद्योग जगत के अनुमानों के मुताबिक, भारत में स्वास्थ्य महंगाई की दर करीब 12 से 14 फीसदी सालाना है। निजी अस्पतालों में एक ही बीमारी या प्रक्रिया के इलाज की कीमत अलग-अलग होने से मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। साथ ही, बीमा कंपनियों को अनुचित और फर्जी दावों से भी नुकसान उठाना पड़ता है।

ये खबर भी पढ़ें…
वंदे मातरम् के गायन पर बाधा डालने पर तीन साल की कैद और जुर्माना 
वंदे मातरम् के गायन पर बाधा डालने पर तीन साल की कैद और जुर्माना 
नई दिल्ली। एजेंसी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को एक विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसके तहत जानबूझकर राष्ट्रगीत 'वंदे...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

अस्पताल-बीमा कंपनियां मिलकर तय करेंगी दरें

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बीच सहमति से विभिन्न बीमारियों और उपचार प्रक्रियाओं की दरों को मानकीकृत करने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए एक समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता इरडा प्रमुख कर रहे हैं। माना जा रहा है कि उपचार की एक समान दरें तय होने से लागत में अनावश्यक बढ़ोतरी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

इस व्यवस्था का एक बड़ा उद्देश्य क्लेम विवादों और धोखाधड़ी वाले दावों को कम करना भी है। इससे मरीजों को इलाज शुरू कराने से पहले संभावित खर्च का बेहतर अनुमान मिल सकेगा और बीमा कंपनियों के लिए दावों की जांच व निपटान की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सकेगी।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा एक्सचेंज पर जोर

स्वास्थ्य मंत्रालय और बीमा नियामक द्वारा विकसित किए जा रहे राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा एक्सचेंज को व्यापक स्तर पर अपनाने की तैयारी है। इसके जरिए अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बीच दावों तथा बिलिंग से जुड़े डेटा के लिए एक समान प्रारूप तैयार किया जाएगा।

ये खबर भी पढ़ें…
छात्रों की जगह एआई एजेंट दे रहे परीक्षा, ऑनलाइन पढ़ाई से लेकर असाइनमेंट तक संभाल रहे
छात्रों की जगह एआई एजेंट दे रहे परीक्षा, ऑनलाइन पढ़ाई से लेकर असाइनमेंट तक संभाल रहे
न्यूयॉर्क। संवाद न्यूज एजेंसी। चैटबॉट से निबंध लिखवाने का चलन अब पुराना पड़ता जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

इससे अस्पतालों से मिलने वाले बिल और बीमा दावों की प्रक्रिया में एकरूपता आएगी। साथ ही, क्लेम के निपटारे में लगने वाला समय कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

स्वास्थ्य बीमा को बढ़ावा देने की तैयारी

देश में स्वास्थ्य बीमा की पहुंच अभी भी सीमित है। भारत में बीमा पर होने वाला खर्च जीडीपी के चार फीसदी से कम है, जबकि वैश्विक औसत सात फीसदी से अधिक बताया जाता है। ऐसे में सरकार स्वास्थ्य बीमा की पहुंच बढ़ाने के साथ ही इसे अधिक सरल और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने पर जोर दे रही है।

सभी कंपनियों को देना पड़ सकता है कॉमन हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट

प्रस्तावित सुधारों के तहत एक कॉमन हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट लाने की भी योजना है। इसे सभी बीमा कंपनियों के लिए अपनी मौजूदा योजनाओं के साथ पेश करना अनिवार्य किया जा सकता है।

ये खबर भी पढ़ें…
अस्पतालों की मनमानी पर लग सकती है लगाम: 3-स्टार होटल से महंगा नहीं होगा कमरा!
अस्पतालों की मनमानी पर लग सकती है लगाम: 3-स्टार होटल से महंगा नहीं होगा कमरा!
नई दिल्ली। निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान कमरे के भारी-भरकम किराये से परेशान मरीजों और उनके परिजनों के लिए...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

इस उत्पाद में विभिन्न बीमारियों और उपचार प्रक्रियाओं के लिए कवरेज की शर्तें और प्रावधान अपेक्षाकृत समान रखे जा सकते हैं। साथ ही, स्वीकार्य उपचारों की सूची भी शामिल की जा सकती है। इससे ग्राहकों को यह समझने में आसानी होगी कि उनकी पॉलिसी में कौन-कौन से इलाज शामिल हैं और किन परिस्थितियों में बीमा का लाभ मिलेगा।

फिलहाल अलग-अलग कंपनियों की पॉलिसियों में कवरेज, शर्तों और दरों में अंतर होने के कारण उपभोक्ताओं के लिए तुलना करना मुश्किल होता है। नई व्यवस्था लागू होने पर बीमा उत्पादों को समझना आसान होगा और बार-बार पॉलिसी बदलने की जरूरत भी कम हो सकती है।

ये खबर भी पढ़ें…
एआई की भूख में लाखों किताबें कुर्बान! पढ़कर नहीं, स्कैन कर नष्ट की जा रहीं पुस्तकें
एआई की भूख में लाखों किताबें कुर्बान! पढ़कर नहीं, स्कैन कर नष्ट की जा रहीं पुस्तकें
एजेंसियां। लंदन। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को इंसानी भाषा और ज्ञान सिखाने की होड़ अब किताबों के अस्तित्व के लिए चिंता...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.