रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की पदोन्नति में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण होने की अनिवार्यता किए जाने के निर्देश को लेकर प्रदेशभर में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। शिक्षक संगठनों ने विभाग के इस निर्देश पर सवाल उठाते हुए इसे वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों के खिलाफ बताया है। संगठनों का कहना है कि नई पात्रता शर्त लागू होने से हजारों शिक्षक पदोन्नति के अवसर से वंचित हो सकते हैं।

 

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भर्ती नियमों में पदोन्नति के लिए टीईटी की अनिवार्यता नहीं

 

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में शिक्षकों की पदोन्नति की शर्तें स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। वर्तमान भर्ती नियम 2026 में भी पदोन्नति के लिए टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य किए जाने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। ऐसे में प्रचलित भर्ती एवं पदोन्नति नियमों से हटकर टीईटी को अनिवार्य करना उचित नहीं है।

 

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उन्होंने कहा कि प्रदेश में व्याख्याता, शिक्षक, पूर्व माध्यमिक शाला प्रधान पाठक और प्राथमिक शाला प्रधान पाठक के हजारों पद रिक्त हैं। इन पदों पर वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति के लिए बड़ी संख्या में शिक्षक पात्र हैं। यदि पदोन्नति में टीईटी की नई शर्त जोड़ दी जाती है तो वर्षों से सेवा दे रहे अनेक शिक्षक पदोन्नति से वंचित हो जाएंगे। इससे शिक्षकों में भारी नाराजगी है।

 

सेवारत शिक्षकों के भविष्य को लेकर बढ़ा तनाव

 

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सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र राठौर ने कहा कि टीईटी की अनिवार्यता के कारण प्रदेश के हजारों सेवारत शिक्षक अपने भविष्य को लेकर भय, असुरक्षा और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। विभाग को शिक्षकों की वर्षों की सेवा, वरिष्ठता और अनुभव को ध्यान में रखते हुए संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।

 

राठौर ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक हजारों सेवारत शिक्षक टीईटी उत्तीर्ण नहीं कर पाए हैं। इसके लिए केवल शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना विभाग की भी जिम्मेदारी है।

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उन्होंने मांग की कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, वरिष्ठता और अनुभव को सुरक्षित रखा जाए। साथ ही टीईटी के नाम पर शिक्षकों में पैदा हुए भय और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए। शिक्षक संगठनों के साथ तत्काल संवाद कर इस मामले का न्यायपूर्ण समाधान निकाला जाए।

 

नियमों से हटकर पदोन्नति हुई तो आंदोलन

 

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा के साथ प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान, वाजिद खान, उपाध्यक्ष देवनाथ साहू, प्रवीण श्रीवास्तव, शैलेंद्र यदु, मुकेश मुदलियार, डॉ. कोमल वैष्णव, प्रदेश सचिव मनोज सनाढ्य और प्रदेश कोषाध्यक्ष शैलेंद्र पारीक ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि वर्तमान प्रचलित नियमों के प्रावधानों के आधार पर वरिष्ठता सूची के अनुसार सभी रिक्त पदों पर पदोन्नति की जाए।