रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। ईडी ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की है। गिरफ्तारी के बाद ईडी की टीम उन्हें कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड की मांग करेगी। गिरफ्तारी की जानकारी मिलते ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी उनसे मिलने कोर्ट पहुंचे।

रामगोपाल अग्रवाल लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर थे। वे करीब तीन साल से फरार बताए जा रहे थे। 8 जुलाई को उन्होंने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) के कार्यालय पहुंचकर सरेंडर किया था। इसके बाद EOW ने उनका मेडिकल परीक्षण कराया और कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेजा गया। बाद में रिमांड की अवधि बढ़ाई गई और उनसे कोयला लेवी, शराब तथा धान से जुड़े मामलों में पूछताछ की गई।

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EOW ने पूछताछ में इन मामलों का किया था उल्लेख

8 जुलाई को EOW ने प्रेस नोट जारी कर बताया था कि कोयला लेवी प्रकरण में कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों, जब्त डायरी और अन्य सामग्री के आधार पर उनसे पूछताछ की गई।

EOW के अनुसार, कोयला लेवी प्रकरण की जांच के दौरान सूर्यकांत तिवारी के पास से जब्त डायरी में कांग्रेस भवन के नाम से करोड़ों रुपये की प्रविष्टियां मिली थीं। जांच एजेंसी का दावा था कि इन प्रविष्टियों से जुड़े धन के संबंध में रामगोपाल अग्रवाल से पूछताछ जरूरी थी।

जांच एजेंसी ने यह भी कहा था कि अग्रवाल लंबे समय से विवेचना में उपलब्ध नहीं हो रहे थे और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत से स्थायी वारंट जारी किया गया था।

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शराब और धान मामले में भी पूछताछ

EOW के मुताबिक, शराब प्रकरण की जांच में भी करोड़ों रुपये कांग्रेस भवन में रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाए जाने के तथ्य सामने आए थे। एजेंसी ने शराब कारोबारी अनवर ढेबर और उससे जुड़े लोगों द्वारा कथित तौर पर रकम पहुंचाए जाने के संबंध में उनसे पूछताछ की थी।

इसी तरह धान से जुड़े मामले में भी जांच के दौरान रोशन चंद्राकर द्वारा कथित तौर पर कांग्रेस भवन में रकम पहुंचाए जाने की बात सामने आने का दावा किया गया था। इन मामलों में धन के स्रोत, डिलीवरी, उपयोग और संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर पूछताछ की गई। EOW ने यह भी बताया था कि रामगोपाल अग्रवाल के पुत्र वैभव अग्रवाल से भी संबंधित मामलों में पूछताछ की गई थी।

कोयला लेवी मामले में 540 करोड़ की अवैध वसूली का आरोप

जांच एजेंसियों के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2022 के बीच कोयला परिवहन से जुड़े कारोबारियों से प्रति टन अवैध वसूली किए जाने का आरोप है। इस मामले में करीब 540 करोड़ रुपये की अवैध लेवी वसूले जाने का दावा किया गया है।

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EOW-ACB ने कोयला लेवी मामले में 35 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। FIR में जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों और कथित वित्तीय लेन-देन का भी उल्लेख किया गया है।

जांच एजेंसी के आरोपों के मुताबिक, कथित कोयला लेवी में रामगोपाल अग्रवाल तक करीब 52 करोड़ रुपये पहुंचाए गए थे। वहीं तत्कालीन मुख्यमंत्री सचिवालय की उप सचिव को कथित तौर पर करीब 36 करोड़ रुपये दिए जाने का आरोप है।

निजी सहायक पर भी गंभीर आरोप

कोल लेवी मामले में आरोपी देवेंद्र डड़सेना को रामगोपाल अग्रवाल का निजी सहायक बताया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, अवैध कोल लेवी से प्राप्त बड़ी मात्रा में नकद राशि को प्राप्त करने और आगे पहुंचाने में डड़सेना की भूमिका थी।

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EOW का दावा है कि कांग्रेस भवन में “भवन” नाम से दर्ज कथित प्रविष्टियां इसी माध्यम से हुए लेन-देन से जुड़ी थीं। एजेंसी के अनुसार, डड़सेना कथित अवैध लेन-देन की श्रृंखला में महत्वपूर्ण कड़ी था।

शराब और कोयला मामलों में अलग-अलग FIR

छत्तीसगढ़ में कोयला लेवी और शराब घोटाले को लेकर अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं। इन मामलों की जांच राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ACB-EOW के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय भी कर रहा है।

रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद अब ईडी कथित मनी ट्रेल, वित्तीय लेन-देन और अन्य आरोपों से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर उनसे पूछताछ करेगी। मामले में आगे कोर्ट की कार्रवाई और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों पर सभी की नजर रहेगी।