रायपुर। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर प्रदेश के सेवारत शिक्षकों के बीच बनी चिंता को दूर करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार राहत की तैयारी में जुट गई है। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की तर्ज पर राज्य में भी लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए अलग व्यवस्था बनाने पर मंथन शुरू हो गया है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत टीईटी का आयोजन छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के माध्यम से ही किया जाएगा, लेकिन इसमें केवल वर्तमान में शासकीय सेवा में कार्यरत शिक्षकों को शामिल करने की योजना है। यानी यह परीक्षा सामान्य या नए अभ्यर्थियों के लिए नहीं होगी।

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शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के हस्तक्षेप के बाद इस दिशा में पहल तेज हुई है। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस बात पर विचार कर रहे हैं कि वर्षों से अध्यापन कर रहे सेवारत शिक्षकों को सामान्य अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा देने की व्यवस्था से अलग कैसे रखा जाए।

शिक्षकों के संघर्ष मोर्चा का कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जो पिछले 20 से 25 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं। लंबे समय से सेवा दे रहे इन शिक्षकों के सामने अब पदोन्नति और सेवा सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है। मोर्चा का तर्क है कि अनुभवी शिक्षकों को नए और फ्रेश अभ्यर्थियों के साथ समान परीक्षा प्रक्रिया में शामिल करना उचित नहीं होगा।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई 2026 के अपने आदेश में इन-सर्विस शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्य योग्यता पूरी करने के लिए समय-सीमा बढ़ाते हुए 31 अगस्त 2027 तक का अवसर दिया है। इसके बाद छत्तीसगढ़ में सेवारत शिक्षकों के लिए अलग टीईटी व्यवस्था की मांग तेज हो गई थी।

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अब सरकार के स्तर पर चल रहे मंथन से प्रदेश के हजारों शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि अंतिम व्यवस्था और परीक्षा की प्रक्रिया को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से आधिकारिक निर्णय का इंतजार है।