नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने यहां जंतर-मंतर पर परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन की जांच के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई है। याचिकाकर्ता के वकील ने मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष जनहित याचिका का उल्लेख किया और मामले को शुक्रवार को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

 

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वकील बरुण कुमार सिन्हा ने कहा, “यह तथाकथित छात्र आंदोलन के खिलाफ है। उन्होंने पूरी दिल्ली को बंधक बना लिया है। सड़कें बंद कर दी गई हैं। दिल्ली के नागरिकों को परेशानी हो रही है।” मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ”ठीक है, (सुनवाई) कल (करते हैं)।” याचिकाकर्ता और अखिल भारत ंिहदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल ने अपनी जनहित याचिका में कहा कि कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं की भागीदारी के साथ-साथ कथित तौर पर विदेशी वित्त पोषित संगठनों की संलिप्तता ने इस प्रदर्शन की “वास्तविक प्रकृति, उद्देश्य और लक्ष्यों” को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

 

जनहित याचिका में कहा गया, “विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और सदस्यों ने प्रदर्शन में भाग लिया और उसे प्रभावित किया, जिससे छात्र प्रदर्शन के रूप में पेश किया गया आंदोलन राजनीतिक आंदोलन में तब्दील हो गया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान एक एंबुलेंस समेत सार्वजनिक आवागमन में बाधा डाली गई, सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, पत्रकारों पर हमले किए गए, संसद भवन के पास सुरक्षा व्यवस्था को भंग करने की कोशिश की गई तथा पुलिस एवं अन्य सरकारी अधिकारियों को चोटें आईं।”

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याचिका में कहा गया, “इन परिस्थितियों में याचिकाकर्ता प्राथमिकी दर्ज करने, प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रमों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच तथा सक्षम प्राधिकारी द्वारा आवश्यक समझे जाने पर संबंधित कानून के तहत जांच के लिए राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण सहित किसी उपयुक्त विशेषज्ञ एजेंसी से जांच कराने के लिए उचित निर्देश देने का अनुरोध किया जाता है।”