रायपुर। विवाह की तैयारी कर रहे परिवारों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। 15 जून को अधिकमास समाप्त होने के साथ ही एक बार फिर शुभ मांगलिक कार्यों और विवाह के मुहूर्त शुरू हो गए हैं। हालांकि यह अवधि बहुत सीमित है, क्योंकि जून और जुलाई में विवाह के लिए केवल 14 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। इसके बाद 25 जुलाई से चातुर्मास प्रारंभ होने के कारण लगभग चार महीने तक विवाह समेत सभी प्रमुख मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।

 
ज्योतिषाचार्यों और पंचांग विशेषज्ञों के अनुसार चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। सनातन परंपरा में इस अवधि को विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। यही कारण है कि अगस्त, सितंबर और अक्टूबर माह में विवाह के शुभ मुहूर्त नहीं रहेंगे।
 
जुलाई के बाद सीधे नवंबर में बजेगी शहनाई
 
देवशयनी एकादशी और चातुर्मास की समाप्ति के बाद 21 नवंबर 2026 से पुनः विवाह मुहूर्त शुरू होंगे। इसके बाद नवंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी में कई शुभ तिथियां उपलब्ध रहेंगी, जिनमें बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित होने की संभावना है।
 
प्राचीन सिद्ध शक्तिपीठ मां महामाया मंदिर के ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जून और जुलाई में विवाह के लिए सीमित लेकिन अत्यंत शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। ऐसे में जिन परिवारों ने विवाह की तैयारियां पूरी कर ली हैं, वे इसी अवधि में शुभ कार्य संपन्न कर सकते हैं।
 
जून-जुलाई में प्रमुख विवाह मुहूर्त
 
जून 2026
 
19, 22, 23, 26, 27, 28 और 29 जून
 
जुलाई 2026
 
1, 6, 7, 21, 24, 25 और 26 जुलाई
 
नवंबर से फरवरी तक विवाह के शुभ मुहूर्त
 
नवंबर 2026
 
21, 24, 25 और 26 नवंबर
 
दिसंबर 2026
 
2, 3, 11 और 12 दिसंबर
 
जनवरी 2027
 
19, 23, 24, 25, 26, 30 और 31 जनवरी
 
फरवरी 2027
 
2, 9, 10, 15, 16, 27 और 28 फरवरी
 
ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि यद्यपि पंचांग के अनुसार ये तिथियां शुभ हैं, लेकिन विवाह की अंतिम तिथि तय करने से पहले वर-वधू की जन्म कुंडली का मिलान और स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त का परीक्षण अवश्य कर लेना चाहिए। चार माह के लंबे अंतराल के कारण नवंबर से फरवरी के बीच विवाह समारोहों की संख्या में भारी वृद्धि होने की संभावना है। विवाह भवन, होटल, मैरिज गार्डन और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों ने भी अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं।

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