छत्तीसगढ़ में विजयादशमी पर्व को लेकर कई तरह की मान्यतायें और रिवाज हैं। कहीं पर रावण को न जलाकर उसकी पूजा की जाती है तो कहीं पर दशानन को तालाब में दहन किया जाता है। इसी तरह से प्रदेश की राजधानी रायपुर में भी गजब की परंपरा है। यहां पर रावण दहन के दौरान विशालकाय दशानन के सामने ट्रेनों की रफ्तार थम जाती है या यूं कहें की ट्रेनें रेंगती हुई चलती है। जरूरत पड़ने पर ट्रेनें खड़ी भी हो जाती हैं। रेल यात्री भी रावण दहन को देखते हैं। दशहरे मेले का आनंद लेते हैं। यह परंपरा पिछले 55 साल से चली आ रही है। लोग इसे चमत्कार मानते हैं।

सुनने में यह किसी फिल्मी सीन की तरह लगता है, लेकिन सौ प्रतिशत सच है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हर साल दशहरे पर यह नजारा देखने को मिलता है। रेलवे मैदान डब्ल्यूआरएस कॉलोनी इस बार फिर एक ऐसे अनोखे और हैरान कर देने वाले वाकये का गवाह बनने जा रहा है। जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश रहती है।

ये खबर भी पढ़ें…
सारंगढ़ भाजपा में अंदरूनी कलह उजागर, बैठक में नेताओं की कार्यशैली पर उठे सवाल
सारंगढ़ भाजपा में अंदरूनी कलह उजागर, बैठक में नेताओं की कार्यशैली पर उठे सवाल
सारंगढ़ जिला भाजपा की बैठक में संगठनात्मक फैसलों को लेकर कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आई। बैठक के दौरान जिला...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

101 फीट का रावण का पुतला होगा दहन

इस बार यहां पर 101 फीट ऊंचे गगनचुंबी रावण का दहन होगा। दरअसलस दशहरा मैदान के किनारे ही रेलवे ट्रैक है। रावण दहन के दौरान इन पटरियों पर दौड़ती ट्रेनों का पहिया थम जाता है। जब मैदान में जलते हुए तीरों से रावण, कुंभकरण और मेघनाद के विशाल पुतलों को अग्नि दी जाती है, तो आसमान रंग-बिरंगी आतिशबाजी और बारूद के धमाकों से गूंज उठता है।

ट्रेन की खिड़की बन जाती है वीआईपी बॉक्स

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे खूबसूरत पल यात्रियों के लिए होता है, जो उस वक्त संयोग से या पहली बार ट्रेन से सफर कर रहे होते हैं। यहां पर जैसे ही ट्रेन की रफ्तार धीमी होती है। यात्रियों के लिए सफर की थकान पलभर में गायब हो जाती है। बिना किसी पास या टिकट के ट्रेन की खिड़की ही उनके लिए वीआईपी बॉक्स की तरह बन जाता है। इन खिड़कियों से वो छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और भव्य रावण दहन का दीदार करते हैं।

अलर्ट रहता है रेलवे प्रशासन

हालांकि रेलवे प्रशासन सुरक्षा मानकों को लेकर अलर्ट रहता है। पुतला दहन के मुख्य समय (पीक ऑवर्स) में यहां से गुजरने वाली ट्रेनों को या तो आउटर पर रोक दिया जाता है या फिर उनकी स्पीड को बेहद धीमा कर दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर लोको पायलट ट्रेन रोक भी सकते हैं। इसके लिये उन्हें इजाजत रहती है। ताकि किसी भी तरह के हादसे को टाला जा सकते।

ये खबर भी पढ़ें…
मोतिहारी में सनसनीखेज मामला, पति के सामने पत्नी से सामूहिक दुष्कर्म, आठों
मोतिहारी में सनसनीखेज मामला, पति के सामने पत्नी से सामूहिक दुष्कर्म, आठों
बिहार के मोतिहारी में कथित तौर पर 8 लोगों ने पति-पत्नी को रास्ते में घेर लिया। आरोप है कि पहले...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.