रायपुर। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में स्पेशल एजुकेटर की सीधी भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य मंत्रिपरिषद ने एकमुश्त व्यवस्था के तहत 100 पदों पर मेरिट के आधार पर भर्ती का निर्णय लिया था। विभाग ने इसके लिए विज्ञापन जारी कर चयन प्रक्रिया शुरू की, लेकिन आरोप है कि योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध होने के बावजूद 100 में से केवल 62 पदों पर ही नियुक्तियां दी गईं और शेष 38 पदों को निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही कैरी फॉरवर्ड कर दिया गया। मामले को लेकर अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार से लेकर केंद्रीय स्तर तक शिकायतें की हैं और भर्ती प्रक्रिया में नियमों के पालन पर सवाल उठाए हैं।

100 पदों पर निकली थी भर्ती, 62 पर ही नियुक्ति

विभागीय दस्तावेजों के अनुसार स्पेशल एजुकेटर के प्राथमिक स्तर के 21, उच्च प्राथमिक स्तर के 21 और माध्यमिक स्तर के 20 पदों समेत कुल 62 पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। वहीं शेष 38 पदों में प्राथमिक के 29 और उच्च प्राथमिक के 9 पद शामिल बताए गए हैं, जिन्हें कैरी फॉरवर्ड कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं का सवाल है कि जब भर्ती प्रक्रिया में पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध थे और पद विज्ञापित किए जा चुके थे, तो शेष पदों को प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही बाहर करने का निर्णय क्यों लिया गया?

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शिकायतों के घेरे में भर्ती प्रक्रिया

  • कुल विज्ञापित पद: 100
  • नियुक्तियां: 62
  • कैरी फॉरवर्ड: 38
  • शिकायत: राज्य से लेकर केंद्र तक
  • मुख्य सवाल: पात्र अभ्यर्थियों के रहते भर्ती प्रक्रिया क्यों रोकी गई?

राज्य से केंद्र तक पहुंची शिकायत

इस मामले में कई अभ्यर्थियों ने स्कूल शिक्षा विभाग के साथ-साथ राज्य के शिक्षा मंत्री, केंद्रीय स्तर के मंत्रियों और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाई है। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि भर्ती प्रक्रिया को समय से पहले समाप्त करने और रिक्त पदों को कैरी फॉरवर्ड करने का निर्णय नियमों के अनुरूप नहीं था। खास तौर पर 15 जुलाई 2026 को जारी आदेश को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यह आदेश विभाग के उपसंचालक के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी हुआ, जबकि विज्ञापन की शर्तों और विभागीय अधिकारों के आधार पर इस तरह का निर्णय किस स्तर से लिया जा सकता है, इसे लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं।

एक साल की वैधता, 10 महीने में ही खत्म करने का आरोप

अभ्यर्थियों की शिकायत का सबसे महत्वपूर्ण आधार भर्ती प्रक्रिया की वैधता अवधि है। विज्ञापन में प्रक्रिया की वैधता एक वर्ष निर्धारित होने का उल्लेख किया गया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही, करीब 10 महीने में, 15 जुलाई को भर्ती प्रक्रिया समाप्त घोषित कर दी गई और शेष पदों को कैरी फॉरवर्ड कर दिया गया। अब सवाल यह है कि यदि भर्ती प्रक्रिया की वैधता एक वर्ष थी, तो उसे उससे पहले समाप्त करने का आधार क्या था और इसके लिए सक्षम स्तर से अनुमति ली गई थी या नहीं?

पात्र अभ्यर्थियों को ही अपात्र करने का आरोप

शिकायतकर्ताओं ने चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई ऐसे अभ्यर्थी थे जिनके पास टीईटी प्रमाणपत्र था और दस्तावेज सत्यापन में वे योग्य पाए गए थे। इसके बावजूद उन्हें संशोधित चयन सूची में शामिल नहीं किया गया और कथित तौर पर अपात्र घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं, काउंसलिंग और स्कूल आवंटन की प्रक्रिया को भी निरस्त कर दिया गया। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों का भी हवाला

मामले में शिकायतकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उन निर्देशों का भी हवाला दिया है, जिनमें दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए स्पेशल एजुकेटर्स की नियुक्ति प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया था। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि जब विशेष शिक्षकों के पदों की आवश्यकता है और पात्र उम्मीदवार उपलब्ध हैं, तब 38 पदों को कैरी फॉरवर्ड करने का निर्णय आखिर किस आधार पर लिया गया?

अब जांच और जवाब का इंतजार

फिलहाल मामला शिकायतों के स्तर पर है और लगाए गए आरोपों पर विभाग की ओर से विस्तृत जवाब सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे प्रकरण में दस्तावेजों, भर्ती नियमों, पदों की स्वीकृति, चयन सूची और कैरी फॉरवर्ड किए गए पदों की प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण होगी। 100 पदों की भर्ती में 62 नियुक्तियों के बाद 38 पदों को प्रक्रिया से बाहर करने का फैसला अब विभाग के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

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