रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पेपर लीक विवाद के बाद अब कृषि पाठ्यक्रम में दाखिले के नाम पर विद्यार्थियों से ठगी की कोशिश का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक कुछ विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को फोन कर दावा किया जा रहा है कि निर्धारित राशि जमा करने पर उन्हें मनचाहे कृषि कॉलेज में प्रवेश दिलाया जा सकता है।

मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल विद्यार्थियों को सावधान करते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसे फोन कॉल फर्जी हैं। विश्वविद्यालय ने अभ्यर्थियों से किसी भी व्यक्ति के झांसे में नहीं आने और दाखिले या सीट दिलाने के नाम पर किसी को भी पैसे नहीं देने की अपील की है।

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पेपर लीक के बाद अब फर्जी दाखिले का विवाद

कृषि विश्वविद्यालय से जुड़ा यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब करीब एक सप्ताह पहले ही परीक्षा में पेपर लीक का विवाद सामने आया था। 20 अगस्त को पेपर लीक की घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन में हड़कंप मच गया था और जांच के बाद दो परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी थीं। परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर विश्वविद्यालय नए कदम उठा रहा है। इसी बीच प्रवेश प्रक्रिया को लेकर फर्जी फोन कॉल्स सामने आने से विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। हालांकि विश्वविद्यालय ने इस मामले में प्रारंभिक सूचना मिलते ही अभ्यर्थियों के लिए अलर्ट जारी कर दिया है, ताकि कोई विद्यार्थी या अभिभावक ठगी का शिकार न हो।

विवि का स्पष्ट अलर्ट

  • दाखिले के नाम पर फोन आए तो पैसे न दें।
  • मनचाही सीट या कॉलेज दिलाने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति पर भरोसा न करें।
  • प्रवेश केवल आधिकारिक पीएटी काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से होगा।
  • संदिग्ध फोन या गतिविधि की तत्काल विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत करें।

विश्वविद्यालय ने कहा- निर्धारित प्रक्रिया से ही लें प्रवेश

विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक बीएससी ऑनर्स कृषि प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए पीएटी काउंसलिंग कृषि महाविद्यालय, रायपुर में संचालित की जा रही है। इसी दौरान कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा विद्यार्थियों और उनके पालकों को फोन किए जाने की जानकारी विश्वविद्यालय के संज्ञान में आई है। इन कॉल्स में प्रवेश अथवा सीट दिलाने के नाम पर राशि की मांग किए जाने की बात सामने आई है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रवेश प्रक्रिया निर्धारित नियमों और आधिकारिक माध्यमों से पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है। इसलिए अभ्यर्थियों को किसी भी अनधिकृत व्यक्ति से संपर्क या लेन-देन नहीं करना चाहिए।

अधिक रैंक वाले विद्यार्थियों को निशाना बनाने की चर्चा

कृषि पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों के बीच प्रतिस्पर्धा काफी अधिक रहती है। प्रदेश में कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में ही कृषि पाठ्यक्रम संचालित होने और सीटें सीमित होने के कारण हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रवेश के लिए प्रयास करते हैं। प्री एग्रीकल्चर टेस्ट में प्राप्त अंकों के आधार पर विद्यार्थियों की रैंक निर्धारित होती है और उसी के आधार पर काउंसलिंग के माध्यम से प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में जिन विद्यार्थियों की रैंक अपेक्षाकृत कमजोर होती है, उन्हें शुरुआती चरणों में सीट मिल सकती है, जबकि अधिक रैंक वाले विद्यार्थियों के लिए प्रवेश की प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है। इसी स्थिति का फायदा उठाने के लिए अधिक रैंक वाले विद्यार्थियों को फोन किए जाने की चर्चा है। हालांकि इन लोगों के पास विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के फोन नंबर या अन्य जानकारी कहां से पहुंची, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

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अब सवाल- छात्रों का डेटा पहुंचा कहां से?

फर्जी कॉल्स के मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित ठगों के पास पीएटी अभ्यर्थियों की जानकारी कैसे पहुंची। यदि फोन करने वालों के पास विद्यार्थियों की रैंक या प्रवेश से जुड़ी जानकारी है, तो डेटा की गोपनीयता और उसके संभावित दुरुपयोग को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों को सावधान रहने की सलाह दी है। आगे जांच में यह स्पष्ट हो सकता है कि फोन करने वाले कौन हैं, उन्हें अभ्यर्थियों की जानकारी कैसे मिली और क्या किसी विद्यार्थी से वास्तव में पैसे की मांग या लेन-देन हुआ है।

कृषि विवि के सामने भरोसा बहाल करने की चुनौती

पेपर लीक के बाद परीक्षा व्यवस्था और अब प्रवेश प्रक्रिया को लेकर सामने आए फर्जी कॉल्स ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है। फिलहाल विश्वविद्यालय ने समय रहते चेतावनी जारी कर विद्यार्थियों को सतर्क किया है। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि फर्जी कॉल करने वालों तक कैसे पहुंचा जाता है और विद्यार्थियों के डेटा की सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं। क्योंकि प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल आधिकारिक काउंसलिंग कराने से नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों के डेटा और पूरी प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित करने से भी जुड़ी है।

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