रायपुर। छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) फंड के कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने मामले में सतपाल सिंह छाबड़ा, मंदीप चावला समेत 17 आरोपियों की कुल 31.70 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इसके साथ ही 17 आरोपियों के खिलाफ रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई है।

ईडी के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने 29 अक्टूबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत कुर्की आदेश जारी किया था। इसके बाद 30 अक्टूबर को विशेष अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत पेश की गई। यह कथित घोटाला राज्य में पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ था।

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ईडी ने यह जांच छत्तीसगढ़ के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो एवं आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (एसीबी/ईओडब्ल्यू) रायपुर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। बाद में कांकेर जिले में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी को भी जांच में शामिल किया गया।

डीएमएफ फंड में कमीशनखोरी का आरोप

ईडी की जांच में सामने आया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों के कल्याण एवं विकास के लिए निर्धारित डीएमएफ फंड का कथित तौर पर सरकारी कर्मचारियों, एजेंटों और बिचौलियों के एक संगठित सिंडिकेट ने दुरुपयोग किया। आरोप है कि इस नेटवर्क ने फंड के आवंटन और उपयोग में हेरफेर कर ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दिलाई, जिनमें खरीद की लागत बढ़ाकर दिखाई जा सकती थी और भारी कमीशन वसूला जा सकता था।

एजेंसी के मुताबिक, रेट कॉन्ट्रैक्ट के तहत काम करने वाली कंपनियों को जारी खरीद आदेशों की कुल राशि पर 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जाता था। इस रकम का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर सरकारी कर्मचारियों और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया जाता था। इसके बदले कंपनियों को डीएमएफ के तहत काम दिलाने, खरीद आदेश जारी कराने और भुगतान जारी करवाने में मदद की जाती थी।

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नकद और बैंक खातों के जरिए होता था लेनदेन

ईडी के अनुसार, अवैध कमीशन की वसूली नकद और बैंकिंग माध्यमों दोनों से की जाती थी। इसके बाद रकम के वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए अलग-अलग संस्थाओं और बैंक खातों के जरिए लेनदेन किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के माध्यम से की गई खरीद में भी इसी तरह कमीशन वसूले जाने का आरोप है। इन मामलों में डीएमएफ के अलावा अन्य सरकारी फंडों का भी इस्तेमाल किया गया था।

सतपाल सिंह छाबड़ा को बताया प्रमुख संपर्ककर्ता

ईडी ने सतपाल सिंह छाबड़ा को कथित सिंडिकेट के प्रमुख संपर्ककर्ताओं और वित्तीय समन्वयकों में से एक बताया है। एजेंसी का आरोप है कि उसने चुनिंदा वेंडरों को सप्लाई के काम दिलाने, खरीद आदेश जारी करवाने, भुगतान रिलीज कराने तथा अवैध कमीशन की वसूली और वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ईडी ने उसे 1 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया था।

अब तक चार गिरफ्तार, 50 करोड़ की संपत्ति जब्त

ईडी के मुताबिक, इस मामले में अपराध से अर्जित कुल रकम लगभग 35 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके मुकाबले ताजा कार्रवाई में 31.70 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गई हैं। मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें छत्तीसगढ़ कैडर की आईएएस अधिकारी रानू साहू भी शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि अब तक इस मामले में लगभग 50 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त या कुर्क की जा चुकी हैं।

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गौरतलब है कि जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) एक ट्रस्ट व्यवस्था है, जिसे खनन पट्टाधारकों के योगदान से राशि प्राप्त होती है। इसका उद्देश्य खनन प्रभावित जिलों के लोगों और क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, कल्याणकारी योजनाओं तथा विकास कार्यों को बढ़ावा देना है। ईडी की कार्रवाई के बाद अब इस कथित घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और वित्तीय लेनदेन की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है।