रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघरिया को धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। बोरघरिया वर्ष 2019 से 2022 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) के पद पर कार्यरत थे।

गिरफ्तारी के बाद ED ने चेतन बोरघरिया को विशेष अदालत के समक्ष पेश किया। कोर्ट ने उन्हें छह दिन की ED रिमांड पर भेज दिया है। अब जांच एजेंसी उनसे CGPSC भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और अन्य संदिग्ध गतिविधियों को लेकर पूछताछ करेगी। ED को पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े अहम तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

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1 सितंबर को चार जिलों में हुई थी ED की कार्रवाई

CGPSC घोटाले की जांच के सिलसिले में ED ने 1 सितंबर 2026 को रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर जिलों में पांच ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। यह कार्रवाई PMLA, 2002 के तहत की गई थी। इसी कार्रवाई के दौरान ED ने उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया था।

ED के अनुसार, जांच में सामने आया कि उत्कर्ष चंद्राकर ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपये से अधिक की रकम कथित तौर पर वसूली थी। एजेंसी का आरोप है कि अभ्यर्थियों को प्रभावित करने और उनसे रकम लेने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के PA-OSD के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया गया।

दो FIR के आधार पर ED कर रही जांच

ED ने बताया कि CGPSC भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितता, प्रश्न-पत्र लीक और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में EOW-ACB रायपुर और CBI-ACB रायपुर की ओर से दर्ज दो FIR के आधार पर धनशोधन की जांच शुरू की गई थी। इन मामलों में CGPSC के तत्कालीन चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी समेत अन्य लोगों के खिलाफ 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, हेरफेर और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं।

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रिश्वत के बदले पेपर लीक करने का आरोप

ED के मुताबिक, जांच में यह सामने आया कि CGPSC परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र कथित तौर पर निजी बिचौलियों के माध्यम से कुछ आरोपियों के रिश्तेदारों और चयनित अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए। एजेंसी का दावा है कि इसके बदले रिश्वत की रकम ली गई और इस तरह डिप्टी कलेक्टर तथा डिप्टी एसपी जैसे पदों पर कथित तौर पर गलत तरीके से चयन सुनिश्चित किया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC-2021 परीक्षा का कथित लीक प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराने का भरोसा देकर अभ्यर्थियों से नकद रकम ली। ED का दावा है कि इस प्रक्रिया से 3 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय जमा हुई।

ED के मुताबिक, इसमें से करीब 2.80 करोड़ रुपये अनिल चंद्राकर को सौंपे गए। एजेंसी का यह भी आरोप है कि उत्कर्ष चंद्राकर ने अभ्यर्थियों से पैसे वसूलने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के PA-OSD के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया।

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