बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद और तलाक के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि विवाह के बाद व्यक्ति की पारिवारिक जिम्मेदारियां बदल सकती हैं, लेकिन इससे बुजुर्ग और बीमार माता-पिता के प्रति उसकी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। यदि पत्नी बिना उचित और ठोस कारण के पति पर अपने बीमार माता-पिता से अलग रहने का लगातार दबाव बनाती है, तो इसे पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना जा सकता है।

जस्टिस एनके चंद्रवंशी की एकलपीठ ने इस आधार पर फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक के फैसले को बरकरार रखा और पत्नी की अपील खारिज कर दी।

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2007 में हुई थी शादी, एक साल बाद शुरू हुआ विवाद

राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ निवासी दतिंदर सिंह भाटिया का विवाह 8 मार्च 2007 को पत्थलगांव निवासी गुरप्रीत कौर से हुआ था। शादी के करीब एक साल बाद ही दोनों के बीच पारिवारिक विवाद शुरू हो गया। विवाद बढ़ने पर पति ने डोंगरगढ़ फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की।

फैमिली कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद 11 नवंबर 2024 को पत्नी के व्यवहार को मानसिक क्रूरता मानते हुए पति के पक्ष में तलाक की डिक्री जारी की। इस फैसले को चुनौती देते हुए पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

पत्नी ने लगाए थे प्रताड़ना और दहेज मांगने के आरोप

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पत्नी ने आरोप लगाया कि सास के उकसाने पर पति उसे प्रताड़ित करता था। उसने यह भी आरोप लगाया कि पेट्रोल पंप शुरू करने के लिए मायके से 50 लाख रुपये लाने का दबाव बनाया गया था। इसके अलावा पत्नी ने माफीनामे पर जबरन हस्ताक्षर कराने का भी आरोप लगाया।

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गवाहों के बयान से आरोपों की पुष्टि नहीं हुई

हाईकोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की। कोर्ट ने पाया कि पत्नी के आरोपों की ठोस पुष्टि नहीं होती। पत्नी के भाई और मामा ने भी अपने बयानों में स्वीकार किया कि उन्होंने बिना किसी दबाव के माफीनामा पढ़ने के बाद उस पर हस्ताक्षर किए थे।

माता-पिता की देखभाल से इनकार करना उचित नहीं: हाईकोर्ट

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू परिवार व्यवस्था में माता-पिता की सेवा और देखभाल करना संतान का महत्वपूर्ण दायित्व है। ऐसे में पति का अपने बीमार पिता की देखभाल के लिए माता-पिता से अलग रहने से इनकार करना स्वाभाविक और उचित माना जा सकता है।

कोर्ट ने माना कि पत्नी द्वारा लगातार पति पर बीमार माता-पिता से अलग होने का दबाव बनाना वैवाहिक जीवन में मानसिक तनाव और प्रताड़ना का कारण बन सकता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और पत्नी की अपील खारिज कर दी।

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