बॉबी ने फिर चौंकाया, अनुराग ने उठाए सवाल

कानूनी मामले में उलझा हुआ एक शख्स और उसकी कहानी पर बनी फिल्म ‘बंदर’। सबसे पहले तो मन में यह सवाल आता है कि फिल्म का नाम ‘बंदर’ क्यों है? इसलिए कि कानून इस शख्स को बंदर की तरह नचाता है? या इसलिए कि यह शख्स अपने ही सर्कस का बंदर हैं? फिल्म सिस्टम से कई सवाल करती है। 
 
 कहानी : कभी किसी जमाने में टीवी पर सुपर स्टार रहा समीर मेहरा (बॉबी देओल) आज अपना कॅरिअर और जिंदगी वापस ठीक करने की कोशिश कर रहा है। उसकी एक पार्टनर है खुशी (सबा आजाद), जिसके साथ उसका रिश्ता ठीक-ठाक चल रहा है। कहानी में मोड़ तब आता है, जब समर की एक्स गर्लफ्रेंड गायत्री (सपना पब्बी) उसकी लाइफ में वापस लौटती है और समीर पर रेप का आरोप लगाती है। इसके बाद शुरू होता है बंदर नाच। फिल्म सिर्फ एक लीगल ड्रामा भर नहीं है, बल्कि समाज की क्रूर सच्चाई पेश करती है। अब आगे समीर क्या करेगा? खुद को कैसे बचाएगा? और क्या वह वाकई बेगुनाह है? यह जानने के लिए आपको फिल्म 
देखनी होगी।
 
 अभिनय : यह कहना गलत नहीं होगा कि फिल्म का पूरा भार बॉबी देआल के कंधों पर है। बॉबी अपने 2.0 वर्जन में अच्छा काम कर रहे हैं। रोमांस, इमोशन्स, लाचारी समेत सभी भावों को वह सादगी से पेश करते हैं। यह उनके कॅरिअर की सबसे इंटेंस और पावरफुल परफॉर्मेंस है। सपना पब्बी को भी क्रेडिट दिया जाना चाहिए। उन्होंने बॉबी का बढ़िया साथ दिया और जैसी किरदार की मांग थी, उसके साथ न्याय किया। उनका किरदार अंत तक आपको परेशान रखता है। सबा आजाद का काम ठीक है। सान्या मल्होत्रा ने अपना काम बखूबी किया है। बाकी स्टार कास्ट भी अच्छी है। बॉबी की एक्टिंग और फिल्म का रियलिस्टिक होना की इसकी बड़ी ताकत है। 
 निर्देशन : अनुराग कश्यप इसी तरह की डार्क फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं। वह इस फिल्म के जरिये सिस्टम की कई कमियों पर बात करते हैं। कई सवाल उठाते हैं। हालांकि, बीच में वह थोड़ा भटकते हैं और अंत में थोड़ा निराश भी करते हैं, पर कुल मिलाकर फिल्म में कुछ नया देखने काे मिलता है। अनुराग का काम ज्यादातर बिना फिल्टर वाला होता है, यहां भी वही काम इस फिल्म को रियलिस्टिक और मजेदार बनाता है। फर्स्ट हाफ थोड़ा स्लो है। फिल्म बिल्कुल आराम नहीं करने देती। क्लाइमैक्स और बेहतर हो सकता था।

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