बिलासपुर। भगवान श्रीजगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा सात दिन तक मौसी मां (गुंडिचा) मंदिर में प्रवास करने के बाद शुक्रवार को भव्य बाहुड़ा यात्रा के साथ पुनः श्रीमंदिर लौट आए। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन, पुष्पवर्षा और जयघोष के साथ महाप्रभु का स्वागत किया। शनिवार, 25 जुलाई को भगवान का भव्य सोनावेश (स्वर्ण श्रृंगार) होगा, जिसमें उन्हें स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत किया जाएगा। इस दिव्य दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

बाहुड़ा यात्रा के दौरान छेरापहरा की परंपरा मंदिर समिति के वरिष्ठ सदस्य गोपालकृष्ण भुइंया ने निभाई। जगन्नाथ सेवा समिति (रेलवे क्षेत्र) के सलाहकार के. बेहरा ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार मौसी मां (गुंडिचा) मंदिर में प्रवास के दौरान भगवान जगन्नाथ मातृस्नेह और वात्सल्य का आनंद लेते हैं। यहां उन्हें विभिन्न प्रकार के व्यंजन और पकवान अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु अपने हाथों से तैयार प्रसाद भगवान को अर्पित करते हैं, जिसे महाप्रभु स्वीकार कर प्रसाद स्वरूप भक्तों में वितरित करते हैं। इस दौरान प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है।

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सुबह मंगल आरती, दोपहर 56 भोग और शाम को श्रीमंदिर पहुंचे रथ

शुक्रवार सुबह 5 बजे भगवान की मंगल आरती के साथ पूजा-अर्चना शुरू हुई। दोपहर 12 बजे 56 प्रकार के भोग अर्पित किए गए। इसके बाद दोपहर 2 बजे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ पर विराजमान होकर श्रीमंदिर के लिए रवाना हुए। शाम करीब 8 बजे रथ श्रीमंदिर पहुंचा, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से रथ पूजन किया गया।

हेरा पंचमी की अनूठी परंपरा

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धार्मिक मान्यता के अनुसार जब भगवान जगन्नाथ मौसी मां के मंदिर जाते हैं, तब माता लक्ष्मी उनसे नाराज हो जाती हैं क्योंकि वे उन्हें रथयात्रा में साथ नहीं ले जाते। हेरा पंचमी के दिन माता लक्ष्मी अपने दूतों के माध्यम से प्रतीकात्मक रूप से भगवान के रथ को आंशिक क्षति पहुंचवाकर अपनी नाराजगी व्यक्त करती हैं और भगवान से शीघ्र लौटने का आग्रह करती हैं।

इन मार्गों से निकली बाहुड़ा यात्रा

बाहुड़ा यात्रा मौसी मां (गुंडिचा) मंदिर से प्रारंभ होकर तोरवा थाना, काली मंदिर, रेलवे जीएम कार्यालय, पोस्ट ऑफिस चौक, जयस्तंभ चौक, दयालबंद, गांधी चौक, पुराना हाईकोर्ट, तारबाहर चौक, बड़ा गिरजाघर, सोलापुरी चौक, स्टेशन चौक और तितली चौक होते हुए श्रीमंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मान्यता है कि रथयात्रा के दौरान स्वयं भगवान अपने भक्तों के बीच पहुंचकर उन्हें दर्शन देते हैं, विशेषकर उन श्रद्धालुओं को जो किसी कारणवश मंदिर नहीं पहुंच पाते।

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